शिक्षा विभाग में हुए भ्रष्टाचार पर पर्दा डाल रहे है बी.ई.ओ. ललित चंद्राकर
शाला अनुदान की राशि में भ्रष्टाचार एवं बच्चों के पोषण आहार को डकार जाने के मामले को बता रहे है आंतरिक मामला।
बालोद (सजग प्रहरी)। बालोद जिला अंतर्गत गुरुर विकास खण्ड के शिक्षा विभाग में विगत कुछ वर्षों से एक से अनेक हैरत अंगेज कारनामें देखने एवं सुनने को मिल रहे है, जिसके चलते शिक्षा विभाग की खूब किरकिरी व बदनामी भी हो रही है। वहीं ऐसे कारनामों के कारण आम लोगों का शिक्षकों के प्रति भरोसा व सम्मान में भी कमी देखने को मिल रहा है, जबकि शिक्षकों को राष्ट्र का निर्माता कहा जाता था तथा उन्हें बड़े ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था। लेकिन विगत कुछ वर्षों से शिक्षा विभाग की हो रही किरकिरी एवं बदनामी पर अंकुश लगाने एवं भ्रष्ट शिक्षकों के काले कारनामों को सार्वजिक कर उन पर उचित कार्यवाही करते हुए उन्हें सबक सिखाने के बजाय उन भ्रष्ट शिक्षकों के काले कारनामों पर पर्दा डालने में लगे हुए हैं ब्लाक शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकर।
विदित हो कि विगत वर्ष एक अय्याश किस्म के एक शिक्षक के द्वारा कुछ स्कूली बच्चियों को उनके पालकों के बिना लिखित सहमति के पिकनिक घुमाने के बहाने उनका हाथ पकड़ कर अपने इश्क का इजहार करने का सनसनी खेज मामला ने खूब बवंडर मचाया था। तथा गुरुर ब्लाक के एक हाई स्कूल के एक शिक्षक को एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने एवं उनके नोटबुक में रुपए रखने के चलते जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। अब एक बार फिर प्राथमिक विद्यालय रमतरा में पदस्थ प्रधान पाठक दीनबंधु ठाकुर के द्वारा भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए शाला विकास के लिए शासन से प्राप्त शाला अनुदान की राशि को नियम विपरीत अपने निजी बैंक खाता में ट्रांसफर कर गबन करने एवं पोषण आहार के रूप में मध्यान भोजन में बच्चों को मिलने वाली पापड़ एवं आचार को भी डकार जाने की जानकारी मिला है। वहीं मामले में ब्लाक शिक्षा अधिकारी गुरुर ललित चंद्राकर से प्रतिक्रिया चाहने पर उन्होंने बताया कि शाला अनुदान की राशि सहित अन्य मदों से भी प्राप्त राशि को सिर्फ वेंडर पद्धति से ही शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा एवं प्रस्ताव के आधार पर ही व्यय किया जा सकता है। यदि किसी भी शिक्षक के द्वारा उक्त राशि को अपने निजी बैंक खाता में ट्रांसफर करता है तो ऐसा कृत्य भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है तथा उनके खिलाफ अपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है।मामले पर समाचार प्रकाशन के बाद ब्लाक शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकर ने मामले की जांच तो करवाया, लेकिन सूचना के अधिकार के तहत उक्त जांच रिपोर्ट की प्रतिलिपि मांगे जाने पर जांच रिपोर्ट को शिक्षा विभाग का आंतरिक मामला बता कर जानकारी देने से साफ इन्कार कर दिया जिससे ऐसा प्रतीत होने लगा है, कि इस तरह की भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहे हैं ब्लाक शिक्षा अधिकारी चंद्राकर। अन्यथा भ्रष्टाचार की जांच रिपोर्ट को आंतरिक मामला बताकर छुपाने का और क्या कारण हो सकता है ? ब्लाक शिक्षा अधिकारी ललित चंद्राकार को स्पष्ट करना चाहिए कि शिक्षा के मंदिर में हुए इस तरह की शर्मनाक भ्रष्टाचार एवं बच्चों को मिलने वाली पोषण आहार को डकार जाने का छिछोड़ी मामला कैसे उनका आंतरिक मामला हो गया।