न्यायालय के आदेश की हो रही है अवमानना, फिर भी प्रशासन के मूकदर्शक बने रहने का लग रहे हैं आरोप।

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बालोद (सजग प्रहरी)।  बालोद जिला अंतर्गत न्यायालय तहसीलदार गुरूर के द्वारा एक मामले में दिनांक 15 जनवरी 2024 को छत्तीसगढ़ भू–राजस्व संहिता की धारा 32 के तहत तत्काल प्रभाव से स्थगन आदेश जारी किया गया है। मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन बताया जा रहा है, लेकिन आरोप है कि अनावेदक के द्वारा “सैय्या भयो कोतवाल, तो फिर डर काहे का ” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए न्यायालय द्वारा जारी किए गए स्थगन आदेश को धता बताते हुए उक्त आदेश का खुल्लेआम उल्लंघन कर न्यायालय के आदेश का अवमानना कर रहा है। उक्त अवमानना के संबंध में आवेदक के द्वारा लिखित रूप में न्यायालय तहसीलदार गुरूर को अवगत कराए जाने की बात बताई जा रही है। इसके बाउजूद न्यायालय के आदेश की खुल्लेआम अवमानना हो रही हो और प्रशासन मामले में मूकदर्शक बन तमाशा देख रहा हो, न्यायपालिका की इससे बड़ा अपमान और क्या हो सकता है?  लेकिन यह बात समझ से परे है कि आखिर न्यायालय के आदेश की अवमानना हो रहा हो और प्रशासन हाथ में हाथ धरे बैठी क्यों है? ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि यदि प्रशासन ही न्यायालय के आदेश की सुरक्षा करने में नाकाम होंगी, तो आम जन–मानस में न्यायालय के प्रति सम्मान कैसे बढ़ेगा?

अवगत हो कि आवेदक घुनेश्वर आत्मज देवनाथ जाति तेली साकिन सोहपुर तहसील गुरूर जिला बालोद (छग) द्वारा आवेदन पेश किया गया था कि ग्राम सोहपुर प.ह.नं. 17 तहसील गुरूर में आवेदक के नाम पर खसरा नंबर 141/3 रकबा 0.25 हेक्टेयर राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है जिस पर अनावेदक ईश्वर लाल पिता दीनाराम जाति तेली साकिन सोहपुर के द्वारा दबंगई करते हुए अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण कर मकान निर्माण कर रहा है। तत्संबंध में आवेदक के द्वारा न्यायालय तहसीलदार गुरूर के समक्ष फरियाद पेश किया था। मामले पर विवेचना उपरांत न्यायालय तहसीलदार गुरूर ने प्रकरण क्रमांक 523 /प्र तह./2024 दर्ज कर उक्त अनाधिकृत निर्माण कार्य पर छ ग भू–राजस्व संहिता की धारा 32 के तहत तत्काल प्रभाव से स्थगन आदेश जारी किया गया है, तत्संबंध में स्थगन आदेश की प्रतिवेदन अनावेदक ईश्वर लाल को तामील किया जा चुका है इसके उपरांत भी अनावेदक ईश्वर लाल के द्वारा न्यायालय के द्वारा जारी स्थगन आदेश की अवमानना कर निर्माण कार्य अनवरत जारी रखा है।

जिसकी लिखित जानकारी आवेदक के द्वारा न्यायालय तहसीलदार गुरूर को प्रदान किया गया है। बाउजूद न्यायालय के आदेश की हो रही अवमानना को लेकर अनावेदक के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्यवाही नहीं होने से अनावेदक का हौसला बुलंद है तथा आम जन–मानस में न्यायालय तहसीलदार गुरूर के प्रति सम्मान में पसोपेश की स्थिति निर्मित होने की खबर आ रही है।

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