जिले के उच्च अधिकारियों पर निर्वाचित जन प्रतिनिधि को राजनीतिक दबाव में पदच्युत करने हेतु साजिश करने का लगा आरोप।
धमतरी (सजग प्रहरी)। धमतरी जिला अंतर्गत कुरूद अनुविभाग में पदस्थ अनुविभागीय अधिकारी पर जिले के उच्च अधिकारियों के द्वारा राजनीतिक दबाव में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आम मतदाताओं के द्वारा चुने हुए एक जनहितैषी, लोकप्रिय पति–पत्नी को लगातार बारी बारी से चार पंचवर्षीय प्रतिनिधित्व दिए जाने से बौखलाहट में साजिश के तहत नियम विपरीत बार–बार सरपंच पद से पदच्युत करने की मंशा से प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है।

अवगत हो कि धमतरी जिले के जनपद पंचायत कुरूद अंतर्गत ग्राम पंचायत दहदहा के सरपंच डीलन चंद्राकर एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती करुणा चंद्राकर की लोकप्रियता इस बात से प्रमाणित हो जाती है कि ग्राम दहदहा की आम मतदाताओं ने लगातार चार पंचवर्षीय से बारी बारी इन्हीं चंद्राकर दंपति को ग्राम पंचायत में सरपंच पद पर प्रतिनिधित्व करने हेतु चुना जा रहा है। वहीं इनकी लोकप्रियता एवं काबिलियत को देखते हुए इन्हें जिले के चारों ब्लाक के समस्त निर्वाचित सरपंचों ने सरपंच संघ जिला धमतरी का अध्यक्ष भी बनाया है। चंद्राकर दंपति की लोकप्रियता कुछ असामाजिक तत्त्वों को हजम (सहन) नहीं हो पा रहा है, फलस्वरूप अपनी नाकामी एवं अलोकप्रियता की खीझ (भड़ास) निकालते हुए इस लोकप्रिय, जनहितैषी जनप्रतिनिधि के खिलाफ झूठा शिकायत कर प्रताड़ित करने की साजिश किए जाने का सिलसिला जारी है।
विदित हो कि 2005 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में डीलन चंद्राकर ने शानदार जीत हासिल कर 2005 से 2010 तक ग्राम पंचायत दहदहा में सरपंच पद पर प्रतिनिधित्व किया। आगामी चुनाव में महिला आरक्षण होने पर ग्राम दहदहा के मतदाताओं ने डीलन चंद्राकर की धर्मपत्नी श्रीमती करुणा चंद्राकर पर भरोसा जताते हुए लगातार दस वर्षों तक प्रतिनिधित्व करने का आशीर्वाद प्रदान किया जिसके तहत श्रीमती करुणा चंद्राकर ने वर्ष 2010 से लेकर 2020 तक सरपंच पद पर प्रतिनिधित्व किया।
इस दौरान चंद्राकर दंपति की लोकप्रियता आम जनता सहित मतदाताओं के दिलों पर राज करने लगा। परिणाम स्वरूप पंचायत चुनाव 2020 में ग्राम दहदहा के आम जनता ने सरपंच पद के लिए पुनः डीलन चंद्राकर को खड़ा किया जहां पर डीलन चंद्राकर के खिलाफ थानेश्वर साहू पिता श्रवण साहू ने चुनाव लड़ा लेकिन ग्राम दहदहा के आम मतदाताओं ने थानेश्वर साहू को सिरे से नकार कर चौथी बार चंद्राकर दंपति पर विश्वास व्यक्त करते हुए डीलन चंद्राकर को भारी बहुमत से विजय दिलाया। इस प्रकार ग्राम पंचायत दहदहा में लगातार चार पंचवर्षीय से चंद्राकर दंपति का प्रतिनिधित्व चला आ रहा है।
गौर करने वाली बात है कि विगत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में अपनी करारी हार से बौखलाए थानेश्वर साहू विगत वर्षों में सरपंच डीलन चंद्राकर के खिलाफ बार-बार झूठा शिकायत करते आ रहा है। फलस्वरूप कभी जनपद स्तरीय तो कभी जिला स्तरीय जांच करवाई जा रही है जिसके तहत लोकप्रिय सरपंच डीलन चंद्राकर के खिलाफ विगत डेढ़ वर्ष के अंदर चार बार धारा 40 का प्रकरण पंजीबद किया जा चुका है। शिकायतकर्ता ने प्रकरण क्रमांक 20230913090003 वर्ष 2022-23 में मनरेगा में मजदूरी भुगतान संबंधी झूठा शिकायत किया गया था जिसमें माननीय उच्च न्यायालय में WPC क्रमांक 3780/2023 के अंतर्गत स्थगन हुआ था फिर भी अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा उच्च अधिकारियों के दबाव में आकर उच्च न्यायालय के आदेशों का अवमानना करते हुए प्रकरण चलाया ही जा रहा था। हालांकि अब उक्त मामले में सरपंच डीलन चंद्राकर को निर्दोष साबित करते हुए प्रकरण नस्तीबद्ध कर दिया गया है। इसी प्रकार द्वितीय प्रकरण क्रमांक 20240113050028 वर्ष 2023–24 में पेंशन भुगतान से संबंधित झूठा शिकायत किया गया था जिसमें अनुविभागीय अधिकारी के द्वारा पुनः उच्च अधिकारियों के दबाव में एक पक्षीय कार्यवाही करते हुए सरपंच डीलन चंद्राकर को पद से मुक्त कर दिया गया था जिसके विरुद्ध माननीय जिलाधीश धमतरी ने अपील प्रकरण क्रमांक 20024001130500288/1301 ALP धारा 91 वर्ष 2023-24 में सरपंच डीलन चंद्राकर को एक बार फिर दोष मुक्त करार देते हुए अनुविभागीय अधिकारी द्वारा आदेशित पद मुक्ति के आदेश को निरस्त किया गया। इसी प्रकार तृतीय प्रकरण क्रमांक 20240713050039 वर्ष 2024–25 में सरपंच डीलन चंद्राकर की पत्नी एवं उनके मां के नाम पर गलत तरीके से राशन कार्ड बने होने का झूठा आरोप लगा कर धारा 40 का प्रकरण लगाया था। जिसमें न्यायालय अनुविभागी अधिकारी राजस्व कुरूद में सरपंच डीलन चंद्राकर के अधिवक्ता के द्वारा जांच करने वाले अधिकारी से प्रतिपरीक्षण के दौरान सवाल जवाब करने पर राशन कार्ड सही तरीके से बनना स्वीकार किया गया। फलस्वरूप न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी कुरूद के द्वारा समस्त आरोपों को गलत मानते हुए इस प्रकरण को खारिज कर दिया गया।
इसके बाद भी बेशर्मी की हद पार करते हुए इस झूठे शिकायतकर्ता के शिकायत पर जिला स्तरीय जांच समिति गठित कर प्रायोजित जांच प्रतिवेदन के आधार पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत धमतरी के निर्देशानुसार अनुविभागीय अधिकारी कुरूद ने चौथी बार धारा 40 का नया प्रकरण क्रमांक 20241213050027 वर्ष 2024–25 दर्ज किया है। जिसमें आरोप लगाया गया है कि सरपंच डीलन चंद्राकर ने वस्तु क्रय अधिनियम का पालन नही किया है। जबकि अधिनियम में दिए गए प्रावधान अनुसार वस्तु क्रय अधिनियम का पालन करने की जवाबदेही ग्राम पंचायत के सचिव का होता है, ना कि निर्वाचित सरपंच का। लेकिन उच्च अधिकारियों ने राजनीतिक दबाव के चलते पंचायत सचिन की जिम्मेदारी की भूमिका को नकारते हुए सरपंच को प्रताड़ित करने की नियत से नियम विपरीत सरपंच के खिलाफ धारा 40 का प्रकरण पंजीबद किया गया है। वहीं इस प्रकरण में बनाए गए पक्षकार (सरपंच) को सूचना तामील किए बगैर ही शीतकालीन अवकाश के समय 31 दिसंबर 2024 को पेशी रखा गया जिसमें जानकारी के अभाव में वे उपस्थित नहीं हो सके। इसके बाद आगामी पेशी दिनांक 02 जनवरी 2025 को रखकर सूचना तामील करवाते हुए बताया गया कि आज ही मामले की पेशी है। आनन फानन में पेशी में उपस्थित होकर सरपंच के द्वारा समय की मांग करने पर मात्र पांच दिनों का मोहलत देते हुए 07 जनवरी 2025 को जवाब प्रस्तुत करने कहा जा रहा है। जबकि किसी भी प्रकरण में मामला पंजीकृत करने के उपरांत कम से कम एक माह का समयावधि प्रदान करने का नियम में प्रावधान है। उपरोक्त विधि विरुद्ध कार्यवाही से प्रतीत होता है कि सरपंच डीलन चंद्राकर को आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव से निर्हित (अयोग्य) करने के उद्देश्य से ही राजनीतिक साजिश के तहत प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का गला घोंटते हुए पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर कार्यवाही किया जा रहा है।
मामले पर अपना पक्ष रखते हुए सरपंच डीलन चंद्राकर ने कहा गया कि शिकायतकर्ता थानेश्वर साहू जो कि विगत त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में उनके विरुद्ध चुनाव लड़ा था तथा अभी तक उक्त चुनाव में हुए अपनी शर्मनाक पराजय से उबर नहीं पाया है। इसलिए कुंठित मानसिकता के चलते दुर्भावना से ग्रसित होकर एक के बाद एक लगातार झूठा शिकायत किए जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि ग्राम पंचायत भवन में प्लास्टिक कुर्सी खरीदने हेतु पारित प्रस्ताव क्रमांक 12 दिनांक 03 अप्रैल 2021 के अनुसरण में 20 नग नीलकमल कंपनी का प्लास्टिक कुर्सी कुल 12400 रूपये में दिनांक 26 अगस्त 2021 को खरीदी किया गया है जिसका भुगतान चेक के माध्यम से किया गया है। उक्त खरीदी में जीएसटी नंबर वाले दुकान से ही सामग्री खरीदने संबंधी शासकीय आदेश सरपंच के पास आज तक नहीं आया है। तथा पंचायत सचिव ने भी ऐसा कोई आदेश प्राप्त हुआ हो कभी भी जानकारी नहीं दिया है और ना ही पंचायत पदाधिकारीयों को पंचायत के किसी भी उच्च अधिकारियों सहित किसी भी सक्षम अधिकारी के द्वारा भंडार क्रय नियम संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है ना ही अवगत कराया गया है।
इसी प्रकार मुख्यमंत्री समग्र विकास योजना अंतर्गत वर्ष 2019-20 में चंद्राकर पारा में सामुदायिक भवन का निर्माण पूर्व सरपंच द्वारा किया गया है जिसका मूल्यांकन व सत्यापन 639344 रूपये है जिसमें से 624344 रूपये का भुगतान हुआ है। शेष राशि ₹15000 (बिजली सामग्री सामुदायिक भवन चंद्राकर पारा) के राशि का बिल का भुगतान तथा ग्राम के गलियों के लिए खरीदे गए बिजली सामग्री दिनांक 09 मार्च 2021 राशि 20000 में से ₹5000 की भुगतान हेतु ग्राम पंचायत के बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया है। उस पर उल्लेखित 20000 रुपए दो पृथक पृथक मद में व्यय की राशि का भुगतान हेतु प्रस्ताव पारित है। यदि सचिव द्वारा लिपिकीय त्रुटिवश अलग-अलग उल्लेखित नहीं किया गया हो तो उसकी जवाबदेही सचिव की है ना कि सरपंच की। चूंकि लिखा पढ़ी का कार्य पंचायत सचिव का है तथा रजिस्टर सचिव के अभिरक्षा में रहता है। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि उनके विरुद्ध की गई शिकायत पूर्वाग्रह से ग्रसित मामला है।
वहीं मामले पर अपना पक्ष रखते हुए जिला पंचायत धमतरी के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुश्री रोमा श्रीवास्तव ने कहा कि धारा 40 कब किन स्थिति परिस्थित में लगाना है, ये अनुविभागीय अधिकारी की विवेक पर निर्भर करता है तथा उनकी जिम्मेदारी है, मेरा नहीं। इसी प्रकार शिकायतकर्ता थानेश्वर साहू एवं अन्य का कहना है कि मुझे सरपंच डीलन चंद्राकर से किसी भी प्रकार की रंजिश नही है। राजनीति में हार जीत लगा रहता है। सूचना का अधिकार लगाना आम नागरिक का अधिकार है। वहीं अनुविभागीय अधिकारी कुरूद डी.डी. मांडवी से उनका पक्ष जानने उनके मोबाइल नंबर 8827662723 पर काल करने पर उन्होंने फोन काल स्वीकार नहीं किया।
उपरोक्त तथ्यों को अवलोकन करने के पश्चात अधिनियम के जानकारों तथा विधि विशेषज्ञों का मानना है कि सरपंच डीलन चंद्राकर के खिलाफ दायर किए गए उपरोक्त प्रकरण एक से लेकर चार तक पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 के अधीन किसी भी सूरत में नहीं आता है। बाउजूद इसके उनके खिलाफ बलात रूप से प. रा.अ. की धारा 40 थोपना “जिसकी लाठी उसकी भैंस” वाली कहावत को चरितार्थ करने के अलावा कुछ भी नहीं है। कार्यपालिका में पदस्थ अधिकारियों के द्वारा नियम विपरीत किया गया दोषारोपण की न्यायपालिका में विधि अनुसार धज्जियां उड़ना निश्चित है। किसी भी प्रभाव शाली राजनीतिक व्यक्ति के इशारे पर एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को इस तरह नियम विपरीत प्रताड़ित करना उच्च अधिकारियों के विश्वशनीयता, ईमानदारी एवं निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। अब देखना होगा कि इस मामले में ऊंट किस करवट बैठता है और उनका आगे हश्र क्या होगा।

वरिष्ठ पत्रकार बसंत ध्रुव एवं गोकुलेश सिन्हा की रिपोर्ट
