वन उपज से बढ़ी महिला स्वसहायता समूहों की आत्मनिर्भरता।

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वन उपज से निर्मित उत्पादन को बेचने की जिम्मेदारी वन विभाग ने ली ।

कुरूद / सजग प्रहरी।  वन मनुष्य जीवन के लिए बहुत ही उपयोगी है। आज शासन के सहयोग से वन क्षेत्र की महिलाएं स्वसहायता समूह के माध्यम से विभिन्न वनोपजों से औषधि तथा खाद्य वस्तुओं का निर्माण कर रही है। तथा उन्हें अब अन्यत्र काम के लिए भटकना नहीं पड़ रहा है। वहीं समूहों द्वारा उत्पादित सामग्री को बेचने की जिम्मेदारी भी वन विभाग ने ले ली है। जिससे इन्हें अच्छी मासिक आमदनी मिल रही है जिसके चलते समूहों की महिलाओं में आत्मनिर्भरता बढ़ी है।

शासन की योजना के अनुरूप वनोउपज का समर्थन मूल्य तय किया गया है, ताकि बिचौलियों से बचा जा सके और पूरा दाम संग्रहण कर्ता को मिले। धमतरी जिले के नगरी वन क्षेत्र में शासन द्वारा वन उपज प्रसंस्करण केन्द्रों की स्थापना की गई है जहां स्व सहायता समूह की महिलाएं वन उपज का प्रसंस्करण कर खाद्य वस्तुएं तथा औषधीयां बनाती है, जिसे वन विभाग द्वारा बाजार  हाट, में तथा विभिन्न स्थानों पर स्टॉल लगाकर बेचा जाता है। 

कुरूद वन मंडल काष्टागार केन्द्र में पदस्थ उपवन क्षेत्रपाल एरावत मधुकर ने बताया कि प्रसंस्करण केन्द्रों से उत्पादित वस्तुओं को वन विभाग द्वारा बेचा जाता है।कुरुद नगर के साप्ताहिक बाजार में स्टाल लगाया गया था जिसमें इमली कैंडी, शहद, पाचक आंवला ,आंवला लछा, आंवला कैंडी, सर्दी खांसी नशाक चूर्ण, च्यवनप्राश, आंवला कैंडी, नमकीन, शुद्ध शहद जैसी खाद्य वस्तुओं का विक्रय किया जा रहा था। साथ ही जोड़ों का दर्द नाशक तेल महाविषगर्भ, औषधि तेल विक्रय हेतु रखा गया था l वन विभाग के कर्मचारी रोशन चंद्राकर ने उत्पादों के फायदा व गुणो से लोगों को अवगत करा रहे थे।

 

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