सुर्रा सोसायटी के प्रभारी प्रबंधक गौतम सिंह पर लगा भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप।

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सोसायटी में बिना धान लाए फर्जी तरीके से आनलाइन खरीदी एंट्री कर भ्रष्टाचार करने का लगा है आरोप।

प्राधिकृत अधिकारी केवल सिंह चंदेल पर मामले में पर्दा डालने का लगा बड़ा आरोप। बड़े स्तर पर भ्रष्टाचार होने की लगाई जा रही है अंदेशा।

गैर जिम्मेदाराना बयान–
सेवा सहकारी समिति सुर्रा में धान खरीदी का कार्य मुख्यतः ठेकेदार एवं  सोसायटी के कर्मचारी देखते हैं –गौतम सिंह राजपूत

बालोद (सजग प्रहरी)।  छत्तीसगढ़ शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर किए गए धान खरीदी में जिले के कई सोसायटियों में शासन द्वारा निर्धारित मापदंड से अधिक धान तौलकर किसानों का आर्थिक रूप से शोषण करने का मामला लगातार सुर्खियों में रहा, तो कुछ सोसायटियों के प्रभारी प्रबंधकों को जहां पदस्थ हैं उसी सोसायटियों में अमानत में खयानत कर अनैतिक रूप से भ्रष्टाचार करने में मशगूल बताए गए।

इसी कड़ी में जिले के गुरूर विकास खण्ड अंतर्गत सेवा सहकारी समिति सुर्रा में पदस्थ प्रभारी प्रबंधक गौतम सिंह राजपूत पर ग्राम सुर्रा के एक किसान जिसके परिवार का सदस्य उक्त सोसायटी में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी भी बताया जा रहा है के नाम पर दिसंबर–जनवरी माह में संबंधित किसान के द्वारा धान लाए बिना ही फर्जी तरीके से धान खरीदी दर्शाकर भ्रष्टाचार करते हुए आनलाइन एंट्री कर राशि जारी करने का मामला प्रकाश में आया है।

मामले को लेकर सोसायटी में कार्यरत हमालों के द्वारा खुलासा करते हुए बताया गया कि टोकन दिनांक को उक्त किसान के द्वारा सोसायटी में धान लाया ही नहीं गया है और ना ही उक्त किसान का धान हमालों ने तौल किया है। प्रभारी प्रबंधक गौतम सिंह राजपूत के द्वारा फर्जीवाड़ा करने की नियत से टोकनधारी किसान से मिलीभगत कर नौ कट्टा धान का तौल पर्ची बनवाकर फर्जी धान खरीदी दर्शाते हुए आनलाइन कर राशि जारी करना बताया गया।

वहीं मामले में अपना पक्ष रखते हुए प्राधिकृत अधिकारी श्री केवल सिंह चंदेल ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कैमरा के सामने बताया कि टोकन दिनांक को वे अन्य कार्यों से बाहर गए हुए थे। उन्हें उक्त फर्जीवाड़ा की जानकारी बाद में हुई है। उन्होंने आगे जानकारी देते हुए कहा कि उनके द्वारा मामले की जानकारी लेने पर सोसायटी में कार्यरत कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि प्रबंधक के द्वारा किए गए फर्जीवाड़ा के समतुल्य धान संबंधित किसान के द्वारा उसी दिन लाकर भरपाई कर दिया है। इस दौरान प्राधिकृत अधिकारी ने बड़ी बात कह दी कि उक्त फर्जीवाड़ा से उन्हें कोई शिकायत नही है। जो कि कई तरह के सवाल खड़े कर रहे हैं।

जबकि तौल ठेकेदार मिश्री यादव ने प्राधिकृत अधिकारी के बयानों का खंडन करते हुए बताया कि फर्जीवाड़ा में संलिप्त किसान के मामले की भंडाफोड़ होने के बाद पुलिस कार्यवाही से बचने डरकर दिनांक 19–20 दिसंबर को नौ कट्टा धान सोसायटी में लाकर जमा किया है। लेकिन जमा किए गए धान का पंचनामा नहीं नहीं बनाया गया है। उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए बताया कि मामले को समिति स्तर पर दबाकर रफ़ादफा करने के उद्देश्य से जमा किए धान का पंचनामा नहीं किया गया है।

वहीं प्रभारी प्रबंधक गौतम सिंह राजपूत ने कैमरा के सामने सोसायटी में किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़ा होने से इंकार करते हुए झूठ बोला कि टोकन दिनांक को उक्त किसान के द्वारा सुबह 7.00 बजे एवं 7.20 बजे दो पिकअप वाहन से धान लाया था जिसका उसने ग्रेडिंग किया है तथा तौलाई के उपरांत उन्होंने आनलाइन खरीदी दर्शाकर भुगतान जारी किया है। जबकि पत्रकारों के द्वारा पूछे गए सवाल कि उक्त किसान के द्वारा दो बार में कुल कितना कट्टा धान लाया था इसका जवाब वे नहीं दे पाए तथा पत्रकारों को गुमराहित करने लगे। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी गलती स्वीकारते हुए कहा कि लालच वश बिना धान लाए ही फर्जी तरीके से धान खरीदी दर्शाकर आनलाइन एंट्री कर दिया था। उन्होंने स्वतः बताया कि टोकन दिनांक के दूसरे दिन उक्त किसान से धान मंगवाकर जारी किए गए राशि की भरपाई कर दिया गया है। लेकिन कथित रूप से मंगाए गए धान की पंचनामा के बारे में पूछने पर बगलें झांकने लगा।

मामले में सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि सेवा सहकारी समिति सुर्रा में धान खरीदी में हुए फर्जीवाड़ा को प्राधिकृत अधिकारी केवल सिंह चंदेल, कार्यरत हमालों सहित तौल ठेकेदार मिश्री लाल यादव तथा प्रभारी प्रबंधक गौतम सिंह राजपूत ने स्वीकार तो किया है तथा बताया जा रहा है कि बाद में उक्त किसान से धान मंगवाकर हुए फर्जीवाड़ा की भरपाई कर दिया गया है। लेकिन कथित रूप से भरपाई के लिए लाए गए धान का पंचनामा के बारे में सवाल पूछने पर सभी लोगों को सांप सुंघ गया है। वहीं प्राधिकृत अधिकारी के द्वारा इस तरह के अपराधिक मामले को अपने स्तर पर दबाकर रखना तथा धान खरीदी में नियुक्त किए गए नोडल अधिकारीयों, निगरानी समिति तथा अनुविभागीय अधिकारी को मामले की जानकारी नहीं देना भी कई सवालों को जन्म दे रहा है। तथा भविष्य में इस तरह के फर्जीवाड़ा की संभावना निश्चित ही और भी बलवती हो रही है।

सेवा सहकारी समिति सुर्रा में पंजीकृत कुछ जागरूक किसानों ने मीडिया (समाचार) के माध्यम से शासन प्रशासन से मांग किया है कि छत्तीसगढ़ सरकार की इस महती योजना “समर्थन मूल्य पर धान खरीदी” में हुए इस भ्रष्टाचार पर स्वतः संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई किया जाए।

 

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