छत्तीसगढ़ में पत्रकार नही है सुरक्षित, शासन चाहे कांग्रेस की रही हो, या भाजपा की– कृष्णा गंजीर
कांग्रेस पार्टी भी प्रदेश के पत्रकारों के साथ कर रहा है भाई भतीजा वाद – पीड़ित पत्रकार विनोद नेताम
बालोद (सजग प्रहरी)। बस्तर के शबरी नदी में चल रहे व्यापक रूप से अवैध रेत उत्खनन एवम रेत तश्करी को कवरेज करने गए बस्तर के चार पत्रकारों को स्थानीय पुलिस प्रशासन के थाना प्रभारी अजय सोनकर के द्वारा झूठे गांजा तस्करी के मामलों में फंसाकर प्रताड़ित किए जाने के मामलों को लेकर प्रदेश सहित देश भर के पत्रकारों में भारी आक्रोश देखने को मिला। मामले को लेकर पत्रकारों के बीच शासन प्रशासन के प्रति बढ़ते आक्रोश को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन के उपमुख्यमंत्री एवम बड़े नौकरशाहों को भी करना पड़ा हस्ताक्षेप तथा साजिश कर्ता थाना प्रभारी को किया गया निलंबित। वहीं मामले को लेकर 14 अगस्त 2024 को कांग्रेस पार्टी ने भी छः सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है, उक्त जांच कमेटी का अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के बालोद जिला अध्यक्ष तथा बेब पोर्टल सजग प्रहरी के संपादक कृष्णा गंजीर ने स्वागत किया है। लेकिन कांग्रेस पार्टी के द्वारा प्रदेश के पत्रकारों के साथ किए जा रहे सौतेला व्यवहार पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए पूछा है, कि आखिर बालोद जिले के कुख्यात कांग्रेस पार्टी के पूर्व विधायक भैय्या राम सिन्हा जिनके खिलाफ थाने में नौ–नौ आपराधिक मामले दर्ज है, जो कि कांग्रेस पार्टी से ताल्लुकात रखने वाली संजारी बालोद विधान सभा की विधायक का पति है उनके एवं उनके गुण्डों के द्वारा पत्रकार विनोद नेताम का अपहरण कर जानलेवा हमले किए जाने के मामले में क्यों नहीं बनाया गया जांच कमेटी ? तथा मामले में प्राथमिकी दर्ज हुए दो सप्ताह से भी अधिक समय बीत जाने के उपरांत भी आखिर आरोपी क्यों पकड़े नही जा सके है? क्या इसलिए कि आरोपी कांग्रेस पार्टी से ताल्लुक रखते है?
विदित हो कि छत्तीसगढ़ में सरकार चाहे कांग्रेस पार्टी की रही हो, चाहे भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश में पत्रकार नहीं है सुरक्षित। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाली संस्था एवं उनके पत्रकारों को सुरक्षा प्रदान करने में दोनो ही पार्टी की सरकारें हमेशा से भेदभाव करती रही है। फलस्वरूप कई पत्रकारों को झूठे मामलों में सलाखों के पीछे यातना झेलना पड़ा है, तो कई पत्रकारों को निरंकुश एवं भ्रष्ट तंत्रों के द्वारा मारपीट कर प्रताड़ित किया जाता रहा है, तो कई को मौत की नींद सुला दिया गया है। जिससे ऐसा लगने लगा है कि दोनो ही पार्टियों की सरकार नहीं चाहता कि कोई भी पत्रकार प्रदेश में हो रहे धांधली, लुट, भ्रष्टाचार, अपहरण , गुंडागर्दी, मनमानी जैसे अनैतिक कृत्यों पर सवाल खड़ा करे। क्या शासन प्रशासन की यही मंशा है कि पत्रकार सिर्फ चाटुकारिता करते हुए सत्ता सरकार का गुणगान करते हुए सत्ता चालीसा गाता रहे? जनहित के मुद्दे उठाना छोड़ दे, अनैतिक कृत्यों को देखकर आंख मूंद ले ताकि सरकार एवं उनके नौकरशाह बेलगाम होकर मनमानी तथा भ्रष्टाचार करता रहे?



सर्व विदित है कि जब भी कोई पत्रकार जनहित के मुद्दों को लेकर शासन एवं प्रशासन से सवाल पूछता है, तो वे उन्हें दुश्मन की नजर से देखने लगता है। जबकि शासन प्रशासन को चाहिए कि उनके सवालों पर संज्ञान लेकर मामले एवं मुद्दों को निराकृत करे। लेकिन शासन प्रशासन है कि मामले, मुद्दों को निराकृत करने के बजाय सवाल उठाने वाले पत्रकारों को ही उठाने एवं निपटाने में आमदा हो जाते रहे हैं, जिसका जीता जागता उदाहरण है कि भाजपा एवं कांग्रेस दोनो के शासन काल में प्रदेश के मुखर पत्रकारगण कमल शुक्ला कांकेर, कुमार जितेन्द्र जायसवाल अंबिकापुर, दिनेश सोनी रायपुर, कृष्णा गंजीर बालोद, अमित मंडावी
बालोद, विनोद नेताम बालोद, संतोष यादव बस्तर, बप्पी राय बस्तर, सुनील नामदेव जैसे अनेकों उदाहरण है जिन्हे शासन प्रशासन ने झूठे
मामले गढ़ कर प्रताड़ित किया है। प्रदेश में सत्ता हाथ से जाने के बाद कांग्रेस पार्टी राजनीतिक लाभ लेने के लिए छत्तीसगढ़ में सत्तासीन भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला करने के उद्देश्य से ही बस्तर के पत्रकारों पर हुए साजिश को लेकर जांच कमेटी बनाई है, अन्यथा बालोद जिले में पत्रकार विनोद नेताम पर हुए हमले को लेकर कांग्रेस पार्टी को क्यों सांप सूंघ गया है? यदि हकीकत में कांग्रेस पार्टी पत्रकारों की सच्ची हमदर्द है तो उन्हें इसका भी जवाब देना चाहिए।
संवाददाता – शालू देवांगन