सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भखारा में मरीजो के पौष्टिक भोजन व्यवस्था में धांधली का आरोप।

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धमतरी/सजग प्रहरी।   सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भखारा में मरीजों को मिलने वाली भोजन वितरण के नाम पर नियम विपरित लाखों रुपए की भुगतान किए जाने का मामला प्रकाश में आया है। सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त दस्तावेजों को अवलोकन करने पर पता चला कि अस्पताल प्रबंधन के द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भखारा में भर्ती होने वाले मरीजों को पौष्टिक भोजन देने के नाम पर भर्राशाही करते हुए नियम विपरित लाखों रूपये का भुगतान किए जाने की जानकारी मिला है। जहां पर किए गए भुगतान में नियमों की अनदेखी करते हुए भंडार क्रय नियमों का भी जमकर धज्जियां उड़ाई गई हैं।

अस्पताल प्रबंधन पर आरोप है कि आरटीआई लगने के बाद सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र भखारा द्वारा आनन फानन में कूट रचित फर्जी भाव पत्र तैयार किया गया है। विदित हो कि जितने भी दस्तावेज बीएमओ द्वारा सूचना के अधिकार के तहत प्रदान किया गया है उसमे कोई भी दस्तावेज जैसे विभाग द्वारा जारी पत्र, समूह और होटल से प्राप्त भाव पत्र में दिनांक और आवक जावक नंबर अंकित ही नहीं है।

कथित रूप से दिनांक 24.12.2023 को सत्र 2024- 25 में जननी शिशु सुरक्षा और अन्तः रोगी भर्ती मरीजों को भोजन प्रदायगी हेतु भाव पत्र आमंत्रित किया गया था। जिसमे जय माँ चंडी महिला स्व सहायता समूह, सुधीर भोजनालय एवं आकांक्षा महिला स्व सहायता समूह से भाव पत्र लिया गया है। जिसका तुलनात्मक अध्ययन वाले नोटशीट में तीन लोग हस्ताक्षर कर प्रक्रिया को पूर्ण कर सुधीर भोजनालय को कार्यादेश जारी किया गया है। लेकिन इसमें भी बड़ा आरोप है कि व्यक्ति विशेष को अनुचित लाभ पहुंचाने की नियत से उक्त भोजन प्रदायगी बाबत किसी भी राष्ट्रीय या प्रादेशिक समाचार पत्रों में भाव–पत्र आमंत्रित हेतु इश्तहार प्रकाशन ही नहीं किया गया है।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भखारा में मनमानी का आलम यहां तक बताया जा रहा है कि अक्टूबर 2023 में 169 भर्ती मरीजों को 600 रुपये की दर से 1014 थाली भोजन का बिल राशि 101400 रूपये अक्षरी एक लाख एक हजार चार सौ रुपया भुगतान राशि में 74000 रुपये का बिल भुगतान बीएमओ के द्वारा किया गया है जिसमें बिल के साथ दिये संलग्न सूची में ना मरीज का भर्ती तिथि अंकित है और ना ही छुट्टी की तिथि अंकित है।

आरोप है कि सूचना के अधिकार के तहत आवेदक के द्वारा 2022 से जनवरी 2025 तक कि जानकारी मांगी गई थी, पर जनसूचना अधिकारी सिविल अस्पताल कुरुद के द्वारा मामले में हुए अनियमितता पर पर्दा डालने आधी अधूरी जानकारी प्रदाय किया है।

मामले को लेकर शासन द्वारा अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिये जाने वाले भोजन के भुगतान में किये गये भ्रष्टाचार की जांच बाबत  शिकायत प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव तेज तर्रार अधिकारी अमित कटारिया के समक्ष किए जाने की बात बताई जा रही है। वैसे भी विभाग के उच्च अधिकारियों को चाहिए कि ऐसे मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर कार्यवाही करनी चाहिए। उच्च अधिकारी यदि जरूरत मंद मरीजों को सरकार के व्यवस्था के तहत अस्पताल में मिलने वाला भोजन इसके साथ मेडिकल प्रतिपूर्ति, यात्रा भत्ता राशि वितरण की ओर भी झांक लेंगे तो कुछ और भी राज खुल सकता है।

 

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