श्री कथा ज्ञान यज्ञ समर्पण भाव से सुनने मात्र से ही लोक परलोक दोनों सुधर जाते हैं– कृष्ण दास महराज जी!
श्री कथा में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज द्वारा रचित श्री लीलामृत ग्रंथ जो 18 पुराण, 6 शास्त्र का सार है जिसका सारगर्भित प्रवचन का लाभ सभी भक्तों ने लिया ।
श्री कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस की शुभारंभ जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज श्री के सिद्ध चरण पादुकाओं का पूजन एवं श्री लीलामृत ग्रंथ का यजमान पुरोहितों तथा भक्तों द्वारा विधिवत शास्त्रीय पद्धति द्वारा पूजन माल्यार्पण कर किया गया ।

बालोद सजग प्रहरी। श्री कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ प्रातः 10 बजे हुआ। श्री कथा ज्ञान यज्ञ के द्वितीय दिवस पर कथा व्यास से जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज के कृपा पात्र शिष्य कृष्णदास महाराज द्वारा श्री लीलामृत ग्रंथ से प्रवचन द्वितीय दिवस में नामदान के महत्व को उपदेशित किया कि नाम हमें आत्मा के उद्धार के लिए लेना है, इस संसार की नश्वर प्राप्तियों के लिए नहीं। नाम लेने का मूल उद्देश्य आवागमन के बन्धन तोड कर परमात्मा से बिछुड़ी आत्मा को परम आनंद के उस महासागर में समया जाना है नाम लेने का निश्चय सही नहीं है कि इस से विशेष इच्छा पूरी हो जाएगी या कोई करामात हो जाएगी। सरदार बहादुर महाराज जी के शब्दों में चन्दन के बहुमूल्य वृक्षों के कोयले बना कर बेचने के समान हैं। नाम संचित कर्मों का नाश करके आत्मा को निर्मल करता है और नाम ही इसे परमात्मा से मिलाता है। सदगुरू भगवान खुद इस संसार से मुक्त होते हैं उनके पास यह अनमोल नाम दान की मिलती है उनसे यह नामदान की अनमोल दौलत लेकर हम भी भवसागर से पार हो सकते हैं इसलिए नाम दान की जरूरत होती है। नामदान एक महत्वपूर्ण आध्यात्मिक प्रक्रिया है जो व्यक्ति को आध्यात्मिक मार्गदर्शन, आत्मा की मुक्ति, आंतरिक शांति, परमात्मा से संबंध, संसार से मुक्ति और पुण्य की प्राप्ति में मदद करती है। यह गुरु मार्ग महान संयम, दृढ़ अनुशासन, अभूतपूर्व लगन और निष्ठा का मार्ग है, और इन गुणों को धारण करने वाले व्यक्ति को ही इस ओर अग्रसर होना चाहिए और जीवन में नामदान लेना ही चाहिए।
श्री कथा में जगद्गुरु रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्य महाराज द्वारा रचित श्री लीलामृत ग्रंथ जो 18 पुराण, 6 शास्त्र का सार है जिसका सारगर्भित प्रवचन का लाभ सभी भक्तों ने लिया ।

श्री कथा ज्ञान यज्ञ समर्पण भाव से सुनने मात्र से ही लोक परलोक दोनों सुधर जाते हैं। श्री कथा में हमारे सनातन हिन्दू धर्म के 18 पुराणों 6 शास्त्र का दिव्य सारगर्भित रस में समाहित होने के वजह से इसे हम भगवतम भी कहते है।जहां अन्य युगों में मोक्ष की प्राप्ति करने के लिए कड़ी मेहनत और परिश्रम करनी पड़ती थी वहीं कलयुग में श्री कथा सुनने मात्र से मुक्ति मिल जाती है। मनुष्य के भीतर का सोया हुआ ज्ञान और वैराग्य जागृत जाते है। श्री कथा उस कल्पवृक्ष के समान हैं जो हमारी इच्छाओं की पूर्ति कर देता है।
स्वस्थ शरीर को बनाए रखने के लिए हम संतुलित आहार लेते हैं। इसी तरह, हम जो कुछ भी देखते हैं, सुनते हैं या मानसिक रूप से ग्रहण करते हैं, वह हमारे दिमाग के लिए आहार बन जाता है। अगर हम अच्छी चीजें ग्रहण करते हैं, तो यह हमारे बुद्धि के लिए अच्छा होता है। लेकिन, अगर हम नकारात्मक चीजें ग्रहण करते हैं जो हमारे जीवन के अहित में हो, तो यह हमारे बुद्धि में अराजकता, पैदा करता है और हम अंततः दुख दरिद्रता को उपलब्ध होते है।
इसलिए, हमारे पास यह सात्विक विकल्प है कि हम सभी अपने मन को क्या खिला सकते हैं। यह अच्छा होगा यदि हम अपने मन और बुद्धि को हमारे वैदिक पुराणों और शास्त्रों की विचारधारा, जान और उनमें समाहित दिव्य लीलाओं से पोषित कर सकें।

प्रवचन पश्चात संध्या रासलीला हुए जिसमें नृत्य, भजन एवं अभिनय तीनो कलाओं के समावेश थे जिसका लाभ सभी भक्तों ने हर्षौल्लास से लिया। रासलीला पश्चात संध्यारती हुई जिसके बाद प्रथम दिवस के कथा को विश्राम देकर प्रसादी भंडारा आयोजन किया गया जिसका लाभ हजारों के संख्या में भक्तों ने लिया।
श्री कथा ज्ञान यज्ञ में अतिथि रूप में श्रीमती सुनीता संजय साहू जनपद अध्यक्ष, श्री दुर्गा आनंद साहू जनपद उपाध्यक्ष, राजेंद्र साहू सरपंच बोहरडीह, भोजाराम देवांगन पूर्व जनपद सदस्य , श्रीमती संध्या अजेनेंद्र जनपद सदस्य, पीठ प्रमुख घनश्याम माहेश्वरी जी, उप पीठ प्रमुख मुन्ना लाल मोटघरे जी, पीठ व्यवस्थापक सुधीर पवार जी, छ ग़ उपपीठ प्रवचन कार्य प्रमुख श्रीमती सुषमा साहू जी, जिला कर्नल कमलेश साहू जी, बालोद जिला निरीक्षक मेघराज निबद्धे जी, बालोद जिला अध्यक्ष ज्ञानेश्वर साहू जी जिलाध्यक्ष स्व-स्वरूप संप्रदाय बालोद एवं बालोद, धमतरी, दुर्ग, राजनांदगांव आदि जिले के भक्त एवं पदाधिकारी उपस्थित थे।
