ग्राम गिधाली में निक्को माइनिंग कंपनी के खिलाफ पानी चोरी की शिकायत: एक गंभीर मुद्दा

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बालोद / सजग प्रहरी / 10 मई 2025   

एक तरफ सरकार पानी की संरक्षण को लेकर बहुत ही संजीदा है, शासन प्रशासन जल संरक्षण बाबत विभिन्न प्रकार के जतन करने में जुटे हुए हैं। वहीं दूसरी ओर सरकार एवं आम लोगों के मंशा के विपरीत बालोद जिले के ग्राम सहगांव में गोदली जलाशय में जल संसाधन विभाग की अनदेखी के चलते विभाग के नाक के नीचे से निर्धारित माप दंड से कही अधिक मात्रा में ग्राम गिधाली में निक्को माइनिंग कंपनी द्वारा पानी की चोरी की किए जाने का आरोप है।

मामले को लेकर ग्राम खलारी में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम में इस मुद्दे को जागरूक लोगों के द्वारा जोर शोर से उठाया गया है। आरोप है कि कंपनी अपने स्वयं के पानी की व्यवस्था नहीं कर रही है और आसपास के किसानों के बोर से पानी लेकर पेयजल का दुरुपयोग कर रही है। जबकि बालोद जिला पेयजल के मामले में रेड जोन घोषित हैं।


स्थानीय लोगों ने शिकायत की है कि निक्को माइनिंग कंपनी ने जल संसाधन विभाग से गोंदली जलाशय ग्राम सहगांव से सिर्फ 36 टैंकर पानी का परमिशन लिया है, लेकिन कंपनी द्वारा मनमानी तरीका से 15-20 की संख्या में टैंकर लगाकर रात-दिन पानी का अवैध परिवहन किया जा रहा है। अनुमानित तौर पर रोजाना लगभग तीन सौ ट्रिप से भी ज्यादा पानी का परिवहन किए जाने का आरोप है जो कि एक गंभीर मुद्दा बना हुआ हहै। सूत्रों के अनुसार जल संसाधन विभाग के द्वारा शिकायत उपरांत कार्यवाही किए जाने की जानकारी मिल तो रहा है लेकिन कंपनी अभी भी अपनी मनमानी करने पर तुला हुआ है।

जानकारी के अनुसार साधना न्यूज़ के ब्यूरो चीफ भगवान दास साहू ने मामले को लेकर कलेक्टर बालोद को अवगत कराया था  इसके बावजूद भी कंपनी पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है। जिसके चलते विभागीय कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगी है।

आखिर लोगो को कब मिलेगा न्याय, यह चिंतन का विषय है!

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि निक्को माइनिंग कंपनी को अपने स्वयं के पानी की व्यवस्था करनी चाहिए और अवैध रूप से पानी का परिवहन बंद करना चाहिए। लोगों का कहना है कि कंपनी की मनमानी से उनके खेतों और जल संसाधनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि उनकी शिकायत पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और निक्को माइनिंग कंपनी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन देखने वाली बात होगी कि प्रशासन ग्रामीणों के भरोसे पर कितना खरा उतरता है।

 

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