राजीव भवन दुर्ग में फटे हाल स्थिति में फहराता रहा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा।
राष्ट्रीय ध्वज का फटे स्थिति में फहराना संविधान अनुसार तिरंगा का अपमान है तथा कठोर सजा का भी प्रावधान है।
राकेश तम्बोली की खास रिपोर्ट:-
दुर्ग / सजग प्रहरी।
जिला कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन दुर्ग में भारत की अस्मिता राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा के साथ गैर जिम्मेदाराना व्यवहार करते हुए खिलवाड़ एवं अपमान पूर्वक तिरंगा फहराए जाने का सनसनी खेज मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस कार्यालय में कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं का लगातार आना जाना लगा हुआ है लेकिन किसी भी नेताओं ने फटे स्थिति में फहरा रहे राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा को बदलकर नया ध्वज फहराने के लिए नहीं कहा और ना ही खुद बदलने का प्रयास किया।
बल्कि इस बारे में हमारे प्रतिनिधि ने दुर्ग शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गया पटेल से बात करनी चाहिए तो उन्होंने आमने-सामने आकर बात करने की बात कही। उन्होंने इसके लिए लगभग एक घंटे का समय मांगा था। लेकिन अब तक उनका व्यक्तव्य सामने नहीं आया है।
हमारे प्रतिनिधि एवं अन्य मीडिया से जुड़े लोग 08 जून को दोपहर दुर्ग ग्रामीण जिला कांग्रेस के कार्यक्रम में कवरेज करने राजीव भवन पहुंचे तो मालूम चला कि कार्यक्रम समाप्त हो गया है। लोगों से जानकारी मिला कि मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू उपस्थित हुए थे तथा साथ में दुर्ग ग्रामीण कांग्रेस के अध्यक्ष राकेश ठाकुर भी शामिल थे।

अवगत हो कि जिला कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में वरिष्ठ कांग्रेस नेता गण दुर्ग शहर कांग्रेस अध्यक्ष गया राम पटेल, भिलाई नगर के मुकेश चंद्राकर, दुर्ग ग्रामीण के राकेश ठाकुर सहित बड़े नेताओं का लगभग हमेशा आना जाना लगा रहता है। बताया जाता है कि यह कार्यालय शहर कांग्रेस कमेटी के नियंत्रण में संचालित होता है जिसके प्रमुख गया राम पटेल जी है।
देश के एक एक नागरिक को भलीभांति जानकारी है कि भारत की शान राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा जिसकी मान बढ़ाने और उनकी हिफाजत के लिए हमारे देश के सैनिक अपना लहू बहाने के लिए तत्पर रहते हैं। उन्हें अपनी जान की परवाह नहीं रहती। लेकिन दुर्ग जिला कांग्रेस कार्यालय में कई दिनों से फटा हुआ तिरंगा झण्डा फहरा रहा है। तिरंगा का अपमान होता रहा और दूसरी ओर कांग्रेस संविधान बचाओ आंदोलन का आयोजन में मस्त रहा। अब बड़ा सवाल यह है कि संविधान में तिरंगा का अपमान जघन्य अपराध है तो इस अपराध की जिम्मेदारी कौन लेगा? लोगों ने कांग्रेसियों से पूछा है कि तिरंगा का खुल्लेआम अपमान कर किस तरह संविधान बचाएंगे।
• राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971:
इस अधिनियम की धारा 2 के तहत, तिरंगे के अपमान पर 3 साल तक की जेल या जुर्माना या दोनों हो सकते हैं.
• भारतीय दंड संहिता (IPC):
IPC के तहत भी तिरंगे का अपमान करने पर सजा का प्रावधान है.
तिरंगे का अपमान क्या है:
• तिरंगे का अनादरपूर्ण उपयोग:
तिरंगे को पहनना, बिछाना, या नैपकीन की तरह इस्तेमाल करना तिरंगे का अपमान है.
• तिरंगे का गलत तरीके से फहराना:
तिरंगा को उल्टा, गंदा, या कटा हुआ फहराना भी अपमान है।
अब समाचार प्रकाशन उपरांत देखना होगा कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा की सम्मान के खातिर जिम्मेदार प्रशासन कितनी तत्परता से इस मामले में संज्ञान लेकर कारवाही करता है।
