ग्राम खुदनी में एक व्यक्ति के द्वारा बारहमासी रास्ता बंद कर दिए जाने से ग्रामीणों में भारी आक्रोश, तनाव का माहौल।

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मध्यस्थता करने पहुंचे प्रशासनिक टीम पर ग्रामीणों ने लगाया पक्षपात करने का आरोप।

प्रशासन की छोटी सी भी चूक मामले को बना सकता है विस्फोटक।

बालोद सजग प्रहरी।
बालोद जिले के गुरूर विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम खुदनी में खार जाने वाले बारह मासी रास्ता को एक किसान के द्वारा ग्रामीणों को परेशान करने की नियत से लोहे का गेट लगाकर ताला बंद कर दिए जाने की जानकारी प्राप्त हुआ है। मामले को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश एवं नाराजगी बताई जा रही है। मामले को लेकर दिन बुधवार को ग्राम खुदनी पहुंचे तहसीलदार हनुमंत श्याम को ग्रामीणों के भड़ास का शिकार होना पड़ा। ग्रामीणों ने तहसीलदार हाय–हाय का नारा लगाते हुए प्रशासन के द्वारा ग्रामीणों के साथ पक्षपात पूर्ण व्यवहार करने तथा सिक्के की खनक से प्रभावित होने का आरोप लगाया है। प्रशासन एवं ग्रामीणों के बीच भारी कशमकश के बाद रात्रि लगभग साढ़े आठ बजे के बाद निर्णय लिया गया कि दिनांक 28 जून को प्रशासन स्वयं उपस्थित होकर सकारात्मक फैसला लेते हुए ग्रामीणों की समस्याओं का निराकरण करेंगे।

 

प्राप्त जानकारी अनुसार ग्राम के ही एक रिटायर्ड शिक्षक एवं किसान पारख सोनभद्र के द्वारा मनमानी करते हुए खार जाने वाली सदियों से चली आ रही परंपरागत तरीके से बारह मासी रास्ता को जानबूझ कर ग्रामीणों को परेशान करने की नियत से तार फेंसिंग कर तथा लोहे का गेट लगाकर ताला बंद कर रास्ता रोक दिया दिया गया है जिसके चलते ग्राम के अन्य किसानों की किसानी कार्य पिछड़ गया है तथा कृषि यंत्र लाने ले जाने व आवागमन का रास्ता अवरुद्ध हो गया है। ग्रामीणों के द्वारा ग्रामीण बैठक कर उक्त किसान पारख सोनभद्र को मनाने एवं समझाने का भरसक प्रयास किया गया लेकिन इसका उन्हें कोई असर नहीं हुआ बल्कि बैठक में ग्रामीणों को कोर्ट कचहरी में निपटने की धमकी दिया गया तथा ग्रामीणों के खिलाफ उन्हें ग्रामीण समाज से बहिष्कृत किए जाने का झूठा शिकायत किया गया है। उक्त रिटायर्ड शिक्षक एवं किसान के इन कृत्यों से परेशान ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला।

 

ग्रामीणों ने बताया कि रिटायर्ड शिक्षक एवं किसान पारख सोनभद्र ने उक्त बारह मासी रास्ता वाला खेत को ग्राम के ही अन्य किसान से यह जानते हुए कि उक्त खेत बारह मासी खार जाने का रास्ता है जान बूझकर जरखरीदी रूप से खरीदा है। तथा वे स्वयं अपने अन्य खेतों में कृषि यंत्र तथा खाद बीज एवं अन्य आवश्यक उपयोग अन्य किसानों की पड़ने वाली बारह मासी रास्ता से होकर गुजारा किया करता है, लेकिन वे स्वयं अपने खेत से होकर गुजरने वाली रास्ता को बंद कर दिया गया है इसी मामले को लेकर विवाद है।

 

ग्रामीणों का आरोप है कि समस्याओं को लेकर प्रशासन को लिखित शिकायत किए जाने के बावजूद प्रशासन के द्वारा किसी भी प्रकार की सार्थक कार्यवाही नहीं किया गया है। बल्कि ग्रामीणों को तारीख पर तारीख दिया जाता रहा है फलस्वरूप ग्राम के अन्य किसानों को किसानी कार्य करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है तथा कई किसानों का किसानी कार्य ठप्प पड़ा हुआ है।

अब देखना होगा कि प्रशासन ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर कितना जवाबदेह एवं संजीदा है तथा आगे क्या रणनीति अपनाते हैं एवं किस तरीके से मामले का पटाक्षेप करते हैं। वहीं गौर करने वाली बात है कि इस मामले में कही प्रशासन ने भूल से भी चूक की तो मामले का विस्फोटक होने से इंकार नहीं किया जा सकता।

 

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