ग्राम खुदनी में बारह मासी रास्ता को लेकर एक किसान एवं ग्रामीणों के बीच चल रहे गतिरोध अब भी बरकरार।

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मामले को सुलझाने प्रशासन की ओर से तहसीलदार हुए मुस्तैद, लेकिन बना हुआ है संशय की स्थिति।

बालोद सजग प्रहरी।
बालोद जिले के गुरूर विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम खुदनी में रिटायर्ड शिक्षक व किसान पारख सोनभद्र तथा ग्रामीणों के बीच खार आने जाने वाली रास्ते को लेकर चल रहे गतिरोध सुलझने का नाम ही नहीं ले रहा है, बल्कि विवाद और भी तनाव पूर्ण होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि तीन चार दिनों से प्रशासन उक्त गतिरोध को दूर करने में लगातार मशक्कत कर रही है तथा प्रशासन पुलिस बल के साथ ग्राम खुदनी में उपस्थित होकर मामले में सतत निगरानी बनाए हुए हैं।

 

प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त विवादित खार आने जाने वाली रास्ता दर्जनों किसानों के निजी खेतों से होकर गुजरती है। चूंकि जब तक किसान एक दूसरे को खार आने जाने में अपनी निजी जमीनों से होकर गुजरने नहीं देगे तब तक एक दूसरे को किसानी कार्य करने में दिक्कतें होंगी ही तथा सैकड़ों किसानों का कृषि कार्य कार्य ठप्प हो जायेगा फलस्वरूप आदि समय से ही ग्रामीण भारत के हर गांवों में यह परंपरा रही है कि खेत चाहे किसी “राजा भोज का हो, चाहे गंगू तेली” का बारह मासी रास्तों को चिन्हांकित कर हमेशा के लिए आवागमन के लिए खुला रखा जाता रहा है। अन्यथा बिना किसी एक दूसरे के सहयोग के “कोई भी अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता” लेकिन ग्राम खुदनी में रिटायर्ड शिक्षक व किसान पारख सोनभद्र यह जानते हुए कि उनके द्वारा खरीदी जा रही उक्त कृषि भूमि बारह मासी रास्ता है फिर भी जान बूझकर ग्राम के ही अन्य किसान से जरखरीदी रूप में हमेशा हमेशा के लिए उक्त कृषि भूमि को खरीद लिया है। तथा अब उक्त कृषि भूमि से होकर किसी भी किसानों को गुजरने एवं कृषि यंत्र लाने ले जाने हेतु प्रतिबंधित कर दिया गया है तथा उक्त रास्ते को तार फेंसिंग एवं ईट की दिवाल खड़ाकर अवरुद्ध भी कर दिया है जिसके चलते ग्राम के सैकड़ों किसानों का कृषि कार्य ठप्प पड़ा हुआ है। वहीं कृषि कार्य यदि समय पर नहीं हुआ तो पूरे साल भर उन्हें आर्थिक नुकसानी झेलना पड़ेगा इस बात को लेकर किसान पारख सोनभद्र एवं ग्रामीणों के बीच मामला तनाव पूर्ण हो गया है।

 

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन की ओर से तहसीलदार हनुमंत श्याम विगत तीन चार दिनों से पुलिस बल की उपस्थिति में लगातार मामले को सुलझाने में भारी मशक्कत कर रहे हैं। लेकिन पारख सोनभद्र है कि अपने उक्त भूमि से किसी भी ग्रामीणों को गुजरने से साफ मना कर दिया है फलस्वरूप ग्राम का माहौल भारी तनाव पूर्ण बना हुआ है। मामले में बड़ा दिलचस्प बात यह भी है कि उक्त रिटायर्ड शिक्षक एवं किसान पारख सोनभद्र का उक्त विवादित भूमि के अलावा  ग्राम में ही अन्य जगहों पर भी कृषि भूमि है जहां पर वे अन्य किसानों के निजी भूमि से ही होकर अपने कृषि यंत्रों सहित स्वयं आवाजाही करते हैं लेकिन अपने निजी भूमि से किसी भी ग्रामीणों को गुजरने नही दे रहा है। जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ प्रतीत होता है। अब इस मामले में ऊंट किस करवट बैठता है यह देखना बाकी है।

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