तमनार जंगल कटाई मामले में भूपेश बघेल जी को विरोध करने का नैतिक अधिकार नहीं – बालक साहू– जिला अध्यक्ष, AAP, बालोद

कांग्रेस भाजपा अडानी के गोद में बैठकर जंगल काट रहे, दोनों की मंशा छत्तीसगढ़ को लूटना है – छाया विधायक चौंवेद्र साहू (लोकसभा सचिव कांकेर)
बालोद/सजग प्रहरी/05 जुलाई 2025
आम आदमी पार्टी बालोद जिला अध्यक्ष बालक साहू ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि रायगढ़ के तमनार में हो रही जंगल कटाई पर आज कांग्रेस पार्टी तथा भूपेश बघेल जो विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, उन्हें विरोध करने का नैतिक अधिकार नहीं है। चूंकि शायद भूपेश बघेल जी यह भूल रहे हैं, कि 2022 में भूपेश बघेल की कांग्रेस सरकार ने पी.ई.के.बी. परियोजना के तहत हसदेव अरण्य में कोयला खनन के लिए वन भूमि की मंजूरी दे दी थी, जिसमें करीब 80,000 पेड़ काटने की अनुमति दी गयी थी और पेड़ काटे भी गए थे। उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य में जंगल की कटाई पर वहां के आदिवासियों ने भारी विरोध जताया था लेकिन भूपेश बघेल जी एवं उनकी सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। और जब हजारों आदिवासी राजधानी रायपुर में अपनी बात रखने के लिए उनसे मिलना चाहते थे तो वे उनसे मिलना भी उचित नहीं समझा। अब राजनीति वश वे केवल दिखावे के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जिसका उन्हें नैतिक अधिकार नहीं है।
आम आदमी पार्टी के लोकसभा सचिव एवं छाया विधायक संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र चौंवेद्र साहू ने कहा कि जब कांग्रेस की सरकार में हसदेव अरण्य के जंगल काटे जा रहे थे तब भाजपा की ओर से केदार कश्यप और राम विचार नेताम जी ने इसका विरोध किया था तथा केदार कश्यप जी ने कहा था कि जंगल नहीं कटना चाहिए। लेकिन आज केदार कश्यप जी आप वनमंत्री हैं, तो आप क्या उस समय के अपने वादे को आज पूरा करेंगे? इस तरह देखा जाये तो जंगल काटने चाहे हसदेव का हो या या तमनार का जंगल। दोनों ही पार्टियों की कथनी और करनी अलग है और यह दोनों पार्टियां अडानी के गोद में बैठे हुए इनको प्रकृति का नुकसान और आदिवासियों के हितों से से कोई लेना देना नहीं है। राज्य एवं केंद्र सरकारों ने इन परियोजनाओं को मंजूरी दी, और दोनों सरकारों पर आदिवासियों और पारिस्थितिकी को नजरंदाज करने का आरोप सही है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ने जंगल कटाई के लिए ग्रामसभा की सहमति के दस्तावेज़ फर्जी बनाये या भ्रामक जानकारी देकर कटाई की। बीजेपी कांग्रेस दोनों की मंशा छत्तीसगढ़ को लूटना है।
जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ कांता गरिया ने कहा कि दोनों पार्टियों ने आदिवासी समुदायों की सहमति, पारदर्शिता, और पारिस्थितिक संतुलन, फर्जी ग्रामसभा और भारी पुलिस तैनाती ने स्थानीय आदिवासी समुदायों के साथ विश्वासघात किया है। हसदेव अरण्य में पेड़ों की कटाई और खनन निष्पादन में दोष केवल एक राजनीतिक पार्टी का नहीं, बल्कि दोनों कांग्रेस और भाजपा की नीतियों और निर्णयों का मिलाजुला परिणाम रहा है।
