ईलाज के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप।
सदमे में पति हुआ बेसुध, प्राथमिक उपचार के बाद किया गया धमतरी रिफर।
कुरूद (सजग प्रहरी)। सर्दी बुखार एवं उल्टी दस्त से पीड़ित 34 वर्षीय महिला ने सिविल अस्पताल कुरूद में ईलाज के दौरान अचानक दम तोड़ दी। महिला की अचानक मौत से उत्तेजित परिजनों ने डॉक्टर एवं स्टाफ नर्स पर ईलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाते हुए मचाया हंगामा, वहीं सदमे में पति हुआ बेसुध, प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर ईलाज के लिए तत्काल धमतरी किया गया रिफर।
विदित हो कि कुरूद नगर से चंद किलोमीटर दूर स्थित ग्राम पंचायत कन्हारपुरी की 34 वर्षीय महिला कौशल्या यादव पति महिपाल यादव उल्टी – दस्त व बुखार से पीड़ित थीं। जिसका इलाज कराने परिजनों ने मंगलवार की सुबह 10 बजे कुरुद सिविल अस्पताल लाया था। जहां पर कुरूद अस्पताल के चिकित्सक ने प्रारंभिक उपचार कर मरीज को भर्ती किया था तथा अगले दिन बुधवार को विभिन्न रक्त परीक्षण करवा कर मरीज को दवा दिए थे कि अचानक दोपहर 3:30 बजे अचानक भर्ती मरीज कौशल्या यादव की मृत्यु हो गई। इस हृदय विदारक घटना के पश्चात इलाज में कोताही बरतने का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल में जमकर हल्ला मचाया। मृतक के ससुर पंचूराम यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि अस्पताल प्रबंधन द्वारा जमकर लापरवाही बरती गई है, यहां ना तो समय में डॉक्टर आता है, और ना ही नर्स आता है, और न हीं समय में मरीजों की चेकअप की जाती है। अस्पताल स्टाफ की लापरवाही से आज मेरी बहू इस दुनिया से चली गई।
पत्नी की मौत के सदमे से पति की बिगड़ा हालत
मृतिका के पति को पत्नी की मौत ने इस कदर झिंझोड़कर रख दिया कि वे सदमे में बेसुध हो गया जिसे प्रारंभिक ईलाज के बाद उनके लगातार गिरते बीपी को नियंत्रण से बाहर होते देख कुरूद अस्पताल के डॉक्टरों ने उसे जिला अस्पताल धमतरी रेफर कर दिया है। अवगत हो कि ग्राम कन्हारपुरी निवासी कौशल्या चार बच्चों की मां थी, जिसमें से बड़ी बेटी 12 साल और सबसे छोटा बेटा 4 साल का है। साथ ही अब पूरे परिजनो को मां बिन बच्चो के परवरिश और पति की हालत को लेकर चिंतित है।
मामले में गौर करने वाली बात है कि अक्सर इस अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से मिलने वाली राशि के चक्कर मे लोगों के द्वारा मरीजों को भर्ती तो कर दिया जाता है, लेकिन यहां उपचार के नाम से कोई सुविधा उपलब्ध नहीं होता है। साथ ही प्रोत्साहन राशि के नाम से बेतरतीब मरीजों को भर्ती किया जाता है। आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन के द्वारा टेबल और स्ट्रेचर में लेटाकर व कुर्सी में ही बैठाकर मरीजों को बॉटल लगा दिया जाता है। लोगों का यह भी आरोप है कि बीएमओ द्वारा मनमानी करते हुए अस्पताल के वार्ड बॉय तथा तृतीय श्रेणी के कर्मचारियों से अपने घर का निजी कार्य भी करवाया जाता है। सनद रहे कि इस तरह की लापरवाही प्रदेश के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री के विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े अस्पताल में आये दिन देखने को मिल रहा है। दोपहर के बाद अस्पताल में हालात ऐसा रहता है कि न तो यहां डॉक्टर मिलते है और न ही अन्य स्टॉफ, मरीजों को दोपहर के बाद अस्पताल में डॉक्टर और अन्य स्टॉफ को इधर उधर ढूंढना पड़ता है, वहां का स्वास्थ्य विभाग भगवान भरोसे संचालित हो रहा है। यहां का व्यवस्था सुधारने के लिये ना ही उच्च अधिकारी ध्यान दे रहे और ना ही स्थानीय नेता। इस अस्पताल की इस तरह की व्यवस्था को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर आज इस घटित इस घटना की जवाबदेही कौन लेगा ? अनुमान लगाया जा रहा है कि पूर्व की ही भांति इस बार फिर “ढांक के तीन पात” वाली कहावत को चरितार्थ करते हुए पुनः इतने बड़े हृदय विदारक घटना के लिये पुराने ढर्रे अनुसार नोटिस जारी कर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
सिविल अस्पताल में हुए इस हृदय विदारक घटना के सवाल पर बीएमओ डॉ यू एस नवरत्न ने कहा कि मामले को संज्ञान में लेकर ड्यूटी पर रहे स्टाफ को शो काज नोटिस जारी किया जाएगा, लापरवाही बरतने वाले स्टाफ पर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। परिजनों के आरोप पर डॉक्टर, महिला स्टाफ एवं नर्स के इलाज में कोताही पर डॉ नवरतन ने उच्चस्तरीय शिकायत करने की बात कहा है। लेकिन देखने वाली बात होगी कि हकीकत में जिम्मेदारों के द्वारा मामले में संज्ञान लेकर व्यवस्था सुधारने में संवेदनशीलता दिखाएंगे, कि आगे भी व्यवस्था भगवान भरोसे ही चलता रहेगा।
संवाददाता–गोकुलेश सिन्हा
