गुरूर जनपद में भ्रष्टाचार का बड़ा खेल, आम जनता के साथ किया गया विश्वासघात।

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जिम्मेदार अधिकारी राशि जारी कर बिना समीक्षा किए ढाई साल से गांधारी की भूमिका में मस्त।

बालोद / सजग प्रहरी।
बालोद जिले के गुरूर विकास खण्ड हमेशा किसी ना किसी मामले को लेकर सुर्खियों में रहता ही है। पूर्ववर्ती सरकार के शासन काल में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाने वाले निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ मारपीट, पत्रकारों पर जानलेवा हमला सहित पूरे क्षेत्र में तानाशाही, गुंडागर्दी, चोरी, छिनारी, लूटपाट, ब्लैकमेल, भ्रष्टाचार, जुआ सट्टा, अवैध शराब बिक्री, झूठ फरेब जैसे कृत्यों से आम जनता हलाकान थे।

लोगों को प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद उम्मीद जगी थी कि अब इन उपरोक्त समस्याओं से निजात मिलेगी तथा यह विकास खण्ड उत्तरोत्तर विकास की राह पर अग्रसर होगा, लेकिन अफसोस कि आम जनता सत्ता परिवर्तन के बाद भी ठगे जा रहे हैं तथा विकास के नाम पर जारी सरकारी रुपयों की बंदरबाट हो रहा है। उपरोक्त कड़ी में जनपद पंचायत गुरूर के ग्राम पंचायत कर्रेझर सहित कई ग्राम पंचायतों के आम जनता एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों एवं भ्रष्ट जनप्रतिनिधियों की जुगलबंदी के चलते  विश्वासघात सहित ठगी का शिकार बताए जा रहे हैं।


प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कर्रेझर में मध्य क्षेत्र विकास प्राधिकरण मद के तहत कर्रेझर से अलोरी पहुंच मार्ग में सीसी रोड निर्माण बाबत दस लाख रुपए स्वीकृत हुआ था। जिसमें दिनांक 17 जनवरी 2023 को तत्कालीन सरपंच कर्रेझर को कार्यादेश जारी हुआ था। उपयंत्री के अनुशंसा पर जनपद पंचायत गुरूर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के द्वारा तत्कालीन सरपंच नरेन्द्र सिन्हा को अग्रिम राशि पांच लाख रुपए जारी किया गया है, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बावजूद ना तो प्रस्तावित स्थल पर सीसी रोड निर्माण हुआ और ना ही उक्त निर्माण कार्य की विभागीय समीक्षा की गई और ना ही जारी किए गए पांच लाख रुपए की जनपद पंचायत गुरूर के द्वारा रिकवरी किया गया। लोगों के द्वारा आशंका जताई जा रही है कि कहीं उक्त जारी किए गए पांच लाख रुपए को भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ तो नहीं चढ़ा दिया गया?

मामले पर पत्रकारों के द्वारा यह पूछे जाने पर कि ढाई साल से भी अधिक समय बीत जाने के उपरांत भी उक्त निर्माण स्थल पर एक भी ढेला का निर्माण कार्य क्यों नहीं हुआ है? मामले की समीक्षा क्यों नहीं की गई? उक्त सवालों के जवाब में मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश रात्रे ने बेतुका जवाब देते हुए कहा कि उन्हें अभी पत्रकारों के द्वारा जानकारी हो रहा है कि राशि जारी होने के उपरांत भी ढाई साल बाद कार्य पूर्ण नहीं हुआ है! इस दौरान उन्होंने कहा कि उपयंत्री एवं एसडीओ RES को भेजकर प्रतिवेदन मंगवाता हूं।

मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए जनपद पंचायत गुरूर की अध्यक्ष श्रीमती सुनीता संजय साहू एवं उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू ने संयुक्त रूप से कहा कि राशि जारी होने के उपरांत भी ढाई साल से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद एक रत्तीभर का निर्माण कार्य नहीं होना बड़ा ही दुर्भाग्यजनक वाक्या है। यदि मामला सदन की संज्ञान में नहीं आया होता, पत्रकारों के द्वारा मुद्दा नहीं उठाया गया होता तो निश्चित ही यह भ्रष्टाचार का मामला फाइलों में दफन हो गया होता। यह वाक्या निश्चित रूप से भ्रष्टाचार की गहरी साजिश प्रतीत होता है।

उन्होंने मुख्य  कार्यपालन अधिकारी के कार्यशैली को लेकर कहा कि जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा यह कहना कि उपरोक्त मामले की जानकारी उन्हें सवाल पूछने वाले पत्रकारों के माध्यम से हो रहा है, बेहद ही गैर जिम्मेदाराना कथन है। उन्होंने कहा कि जिस अधिकारी के हस्ताक्षर से राशि जारी हुआ हो, उस अधिकारी का यह कथन उनकी उक्त भ्रष्टाचार में संलिप्तता प्रमाणित होता है।

उन्होंने मामले को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कहा है तथा आवश्यकता अनुसार विभागीय कार्यवाही भी की जाने की बात कहा। उन्होंने कहा कि आखिर ढाई सालों तक जिम्मेदार अधिकारी गांधारी की भूमिका में आंखों में पट्टी क्यों बांध रखा था? अब तक उक्त कार्यों की समीक्षा (मॉनिटरिंग) क्यों नहीं की गई? संबंधितों को नोटिस जारी क्यों नहीं किया गया?

अब देखने वाली बात होगी कि इस सनसनी खेज भ्रष्टाचार के मामला का खुलासा होने के बाद इसके अलावा और ऐसे ही कितने मामले दफन होंगे? जांच का विषय है।

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