कुरूद देश का इकलौता विधानसभा होगा जहां एक ही विधानसभा में चार महाविद्यालय होंगे।

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कुरूद/सजग प्रहरी।
छत्तीसगढ़ शासन उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त ने विधायक अजय चन्द्राकर के प्रस्ताव को स्वीकारते हुए 2025-26 के मुख्य बजट से कुरूद में बी.ए.  एल.एल.बी. शासकीय महाविद्यालय भवन निर्माण के लिए 4 करोड़ 65 लाख 84 हजार रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है। इस खबर से पालकों एवं अंचल के छात्रों में हर्ष व्याप्त है।

विधायक अजय चन्द्राकर ने कुरूद विधानसभा को विशेष पहचान दिलाने के लिए इसे एजुकेशन हब के रूप में बनाने का बीड़ा दो दशक पहले से उठा चुके हैं। उनकी सोच ही हैं कि शिक्षा एक प्रकाश है जो अज्ञानता को दूर करती है और व्यक्ति तथा समाज को आगे बढ़ाती है। इस ज्ञान, कौशल और मूल्यों को विकसित करके एक सभ्य, सुसंस्कृत और जिम्मेदार नागरिक बनाने का एक व्यवस्थित प्रक्रिया है। फलस्वरूप आज क्षेत्र नवोदय सेंटर ऑफ एक्सीलेंस आई.टी.आई., केन्द्रीय विद्यालय, कृषि महाविद्यालय एवं शासकीय महाविद्यालय से समृद्ध है।

इस बारे में कुरुद नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति भानु चन्द्राकर एवं भखारा नपं अध्यक्ष ज्योति हरख जैन ने कहा कि कुरूद अपनी संस्कृति और राजनीतिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।

उन्होंने कहा कि यहाँ के महाविद्यालय में अनन्य  विषयों में स्नातकोत्तर, बीएड, बीपीएड, बायोटेक्नोलॉजी और कंप्यूटर जैसे विषयों में डिग्री होने के बाद विधायक अजय चंद्राकर ने अपने कौशल से इस बजट में एलएलबी कॉलेज को शामिल करावाकर युवा वर्ग को एक और सौगात दी है।

इसी संदर्भ में जनपद अध्यक्ष गितेश्वरी साहू का कहना है कि दूरदर्शी सोच, निःस्वार्थ समाज सेवा की भावना से विधायक ने शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं के लिए जो काम किया है वह सदियों तक आगामी पीढ़ी को संवारने का काम करेगा।

उन्होंने कहा कि वकालत महज एक डिग्री ही नही बल्कि इस विषय से युवाओं को स्वरोजगार और न्यायसंगत समाज भी मिलेगा। अजा मोर्चा के जिलाध्यक्ष हरिशंकर सोनवानी ने कहा कि वकालत की पढ़ाई शुरू होने से एक दिन ऐसा भी आएगा जब कुरूद से निकले छात्र प्रदेश ही नहीं देश के किसी बड़ी अदालत में मुख्य न्यायाधीश की भूमिका में जरूर होंगे।


कुरुद में लॉ महाविद्यालय खोलने की घोषणा का स्वागत करते हुए युवाओं ने कहा कि एक विधानसभा में चार महाविद्यालय वाला देश का इकलौता विधानसभा कुरुद होगा। एक जमाना ऐसा भी था जब हमें पढ़ाई करने बाहर जाना पड़ता था, लेकिन अब ग्रामीण क्षेत्र के युवा भी अपने आसपास ही उच्च शिक्षा हासिल कर अपना भविष्य (कैरियर) बना सकते हैं।

                          वरिष्ठ पत्रकार बसंत ध्रुव 

 

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