अस्पताल प्रबंधन मरीजों से सौहार्दपूर्ण व्यवहार कर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराये-भानू चंद्राकर
कुरूद (सजग प्रहरी)। विगत दिनों धमतरी जिले के सिविल अस्पताल कुरूद में अस्पताल प्रबंधन की लापहरवाही के चलते एक हृदय विदारक घटना में चार बच्चों की मां जिसकी उम्र महज 34 वर्ष की ही थी जिनकी मृत्यु हो गई, जिससे उनके परिजन आहत है तथा बच्चों के सिर से माँ का साया भी उठ गया है, बताया जा रहा है कि इस घटना की जवाबदेही अब तक स्वास्थ्य विभाग कुरूद तय नही कर पाई है। अवगत हो कि यह सिविल अस्पताल लगातार कुछ न कुछ घटनाओं के चलते हमेशा से सुर्खियों में बना हुआ है, जिसमे अधिकतर घटनाएं अस्पताल प्रशासन के कार्य में लापरवाही की वजह से घटित होने की जानकारी मिला है।
अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरोप यह भी है की सिविल अस्पताल कुरूद में जो भी कर्मचारी जिम्मेदारी पूर्वक अपना कार्य का निर्वहन करते रहे है, ऐसे कर्मचारीयों पर ही कार्य के लिये दबाव डाला जाता है तथा उनका वेतन भी लेट लतीफी से मिलता है। जबकि जो कर्मचारी कामचोरी करते हैं, अपने काम में मनमानी करते रहे है ऐसे कर्मचारी को ज्यादा तवज्जो दिया जाता है, चूंकि ऐसे कर्मचारी चापलूसी करने में माहिर होते है। इसी लिए ऐसे कर्मचारियों का वेतन आसानी से आहरण होने की भी जानकारी मिला है। बताया जा रहा है कि सिविल अस्पताल में अधिकारियों के पैर छूने, चाटूकारिता करने, जी हुजूरी करने का बोलबाला है। वहीं सूत्र आगे बताते है कि इस अस्पताल में जातिवाद के चलते एक विशेष जाति वर्ग के कर्मचारियों के लिये ड्यूटी करने न करने के लिये खुली छूट है। इस तरह के जातिगत भेदभाव शासकीय कार्यलय के लिये कतई उचित नहीं माना जा सकता है, अधिकारियों को सभी कर्मचारियों के लिये समान भाव रखना चाहिए, चूंकि सभी अधिकारी, कर्मचारी शासकीय कार्य के लिए सरकार से वेतन लेते है। सभी अधिकारी, कर्मचारियों का दायित्व है कि वे अपनी जिम्मेदारियो का निर्वाहन सही तरीके से करते हुए आमजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया कराए और उपचार करे। क्षेत्र के जागरूक लोगों ने प्रशासन से मांग किया है कि आयुष्मान कार्ड प्रोत्साहन राशि के नाम पर अनाप शनाप तरीके से कोई भी मरीज को बेवजह भर्ती ना करें, बल्कि जरूरतमंद मरीजों को ही उपचार के लिए भर्ती रखना चाहिये, साथ ही बीएमओ को चाहिए कि शासकीय कर्मचारियों से अपने घर का निजी कार्य करवाने से भी बचना चाहिए। शिकायत मिला है कि सिविल अस्पताल कुरूद में कृपा प्राप्त दो नेत्र सहायक चिकित्सक पदस्थ है, जिसमे एक का मूल पदस्थापना सिर्री है, जो कि कुरूद में नेत्र सहायक के स्थान पर काम कर रहे है और कुरूद में जिनका पदस्थापना है उसको सिर्री में पदस्थ कर रखें है। साथ ही एक और अतिरिक्त नेत्र सहायक यहां पर कार्य कर रहे है , जिसे भी जनहित में किसी एक को वर्तमान में जहां स्थान रिक्त हैं उन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में पदस्थ करना चाहिए, ताकि दोनों अपनी कार्यों का निर्वहन अपने अपने पदस्थापना स्थल पर रहकर जिम्मेदारी पूर्वक कर सके।
गत दिनों घटित घटना को लेकर प्रभारी बीएमओ डॉ उमाशंकर नवरत्न के द्वारा बताया गया कि सभी डॉक्टरो और अन्य स्टॉफ का बैठक रखकर सभी को सूचित किया गया है कि उक्त घटना से आम जनों में अस्पताल प्रशासन एवं स्टॉफ के व्यवहार को लेकर भारी आक्रोश व्याप्त है। अतः सभी निर्धारित समय तक अपने अपने कार्य में उपस्थित रहकर जिम्मेदारी पूर्वक अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें , तथा मरीजों से सौहार्दपूर्ण व्यवहार करने हेतु समझाईश दिया गया है तथा हिदायत दी गई है कि प्रकार के गलतियों कि पुनरावृत्ति ना हों।
वहीं उपरोक्त मामले को लेकर नगर पंचायत कुरूद के नेता प्रतिपक्ष भानु चंद्राकर का कहना है कि लगतार सिविल अस्पताल कुरूद में इस प्रकार की घटनाएं घटित हो रही है, जिससे आमजनों से शासकीय अस्पताल में ईलाज करवाने से भरोसा उठते जा रहा। इसलिए अस्पताल प्रबंधन को चाहिए कि मरीजों के बेहतर उपचार के लिये सभी चिकित्सक और स्टॉफ एक दूसरे का टांग न खींचते हुए आपसी तालमेल बनाकर बेहतर कार्य करे, ताकि जनता के बीच शासकीय अस्पताल के प्रति भरोसा बरकरार रहे और जनता के आक्रोश का सामना न करना पड़े ।
संवाददाता – गोकुलेश सिन्हा
