ग्राम पंचायत भवन डांडेसरा मे संविधान दिवस का किया गया आयोजन।

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बालोद / सजग प्रहरी।
दिनांक 26 नवंबर को संविधान दिवस के शुभ अवसर पर टोमन लाल साहू जी सरपंच डांडेसरा, श्री तामेश्वर साहू जी अध्यक्ष ब्लॉक कांग्रेस कमेटी गुरुर, श्री योगेन्द्र कुमार निषाद सचिव, श्री तोमेश्वर साहू जी ग्राम रोजगार सहायक के द्वारा संविधान निर्माता श्री भीमराव अम्बेडकर जी के तैल चित्र पर माल्यार्पण एवं गुलाल वंदन कर पूजा-अर्चना कर संविधान दिवस मनाया गया।

इस अवसर पर तामेश्वर साहू जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि 26 नवंबर को संविधान दिवस मनाया जाता है। यह दिन हमारी लोकतांत्रिक पहचान की नींव है। यह हमारे अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों के बारे में बताता है। संविधान दिवस पर हम समझते हैं कि यह हमारे लोकतंत्र की रीढ़ है जिसे न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के तौर पर देखा जाता है। 26 नवंबर 1949 को हमारी संविधान सभा ने डॉ. बीआर अंबेडकर के नेतृत्व में भारत का संविधान अपनाया और यह दिन हमारे लोकतंत्र के लिए हमेशा के लिए महत्वपूर्ण बन गया। संविधान हमें बुनियादी अधिकार देता है और हमारी जिम्मेदारियों को बताता है। संविधान दिवस के रूप में मनाया जाने वाला यह दिन हमें उन सिद्धांतों को संजोने और बनाए रखने की याद दिलाता है जो हमारे देश को एकजुट और आज़ाद रखते हैं। आइए हम अपने संविधान का सम्मान करें और दूसरों को जागरूक करें।

इस दौरान टोमन लाल साहू जी ने भी संविधान के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि 26 नवंबर को देश में संविधान दिवस इसलिए मनाया जाता है कि हम सभी अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों का ध्यान रखें। हमारा संविधान, जो 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था और यह दुनिया के सबसे लंबे लिखित संविधान के रूप में जाना जाता है। यह हमें एक सॉवरेन, सोशलिस्ट, सेक्युलर और डेमोक्रेटिक रिपब्लिक में रहने का फ्रेमवर्क देता है। प्रिएंबल सभी नागरिकों के लिए न्याय, समानता और भाईचारे जैसे मूल्यों के लिए है। संविधान के लिए हम बाबा साहेब यानी डॉ. बीआर अंबेडकर के योगदान को भी याद करते हैं। हमारे संविधान द्वारा सुरक्षित फंडामेंटल राइट्स और ड्यूटीज हमें मजबूत बनाते हैं लेकिन हमें अपने जिम्मेदारी की भी याद दिलाते हैं। हम सभी इन मूल्यों का सम्मान करें और देश के विकास और मजबूती में अपना दायित्व बनाए रखें।

संविधान दिवस भारत को उसकी डेमोक्रेटिक स्पिरिट देता है। संविधान हमें अधिकार और आजादी देता है। 26 नवंबर का इतिहास,संविधान की जानकारी, संविधान को बनाने में लोगों के योगदान आदि की जानकारी, डॉ. भीमराव अंबेडकर का योगदान, मौलिक अधिकार-कर्तव्य, लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिकों की जिम्मेदारी आदि की बातो की याद दिलाता है। भारत में इसे संविधान दिवस या नेशनल लॉ डे के नाम से भी जाना जाता है। इसी दिन 1949 में, संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अपनाया था। डॉ. बीआर. अंबेडकर को भारतीय संविधान का जनक कहा जाता है। यह दिन हमें संविधान का महत्व समझाता है।

संविधान दिवस के शुभ अवसर पर समस्त पंचगण पारख राम साहू जी, श्रीमती लिलेश्वरी साहू, श्रीमती सगनी साहू, श्रीमती चमेली साहू, श्रीमती भूपेश्वरी साहू, श्रीमती जानकी साहू, भृत्य तिलोकचंद साहू एवं ग्रामीण रामनाथ साहू, अनुसूईया बाई,  सुगंधी बाई एवं ग्रामीण जन उपस्थित रहे।

 

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