जनप्रतिनिधि की उपेक्षा पर गरमाया माहौल: अरमरीकला के जन समस्या निवारण शिविर में जिला पंचायत सदस्य ने जताया विरोध
बालोद। जिले के गुरूर विकासखंड के ग्राम अरमरीकला में गुरुवार (02 अप्रैल) को आयोजित जिला स्तरीय जन समस्या निवारण शिविर उस समय विवादों के घेरे में आ गया, जब स्थानीय निर्वाचित जनप्रतिनिधि ने प्रशासन पर उपेक्षा का आरोप लगाते हुए मंच पर अपनी बात रखने का अवसर न दिए जाने पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया। शिविर के दौरान मचे इस घमासान से प्रशासनिक व्यवस्थाओं और सत्तापक्ष के बीच तालमेल की कमी उजागर हुई है।

मिली जानकारी के अनुसार, इस शिविर में विकासखंड के समस्त विभागों के अधिकारी, कर्मचारी और क्षेत्र के ग्रामीण अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत क्षेत्र क्रमांक 04 की निर्वाचित सदस्य तथा जिला पंचायत बालोद में सभापति श्रीमती लक्ष्मी साहू को क्षेत्र की समस्याओं पर बोलने का मौका नहीं दिया गया। श्रीमती साहू और वरिष्ठ समाजसेवी तथा भाजपा जिला किसान मोर्चा के कोषाध्यक्ष अशोक कुमार साहू ने प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में शिविर आयोजित है, वहीं की निर्वाचित जनप्रतिनिधि को जनता की आवाज उठाने से रोकना लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन है। इस घटना के बाद ब्लॉक और जिला प्रशासन की कार्यशैली को लेकर जनप्रतिनिधियों और उनके समर्थकों में भारी नाराजगी देखी गई।
ग्रामीणों का कहना है कि एक ओर सरकार जन समस्याओं के त्वरित निराकरण का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर चुने हुए प्रतिनिधियों की आवाज दबाई जा रही है। वर्तमान में इस उपेक्षा को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है, जो आने वाले समय में प्रशासन के लिए चुनौती बन सकती है।
मामले को लेकर भाजपा जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की प्रशासन के लोगों के द्वारा इस तरह की उपेक्षा करना प्रशासनिक तानाशाही है जो कि कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन का यदि इसी तरह की रवैया रहा तो आगामी दिनों में कोई भी भाजपा का निर्वाचित जनप्रतिनिधि या कार्यकर्ता ऐसे आयोजनों में कोई सहयोग नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि प्रशासन अपना कार्यशैली सुधारे अन्यथा ऐसे मामलों की शिकायत प्रदेश स्तर पर की जाएगी।
