पीड़ित लोहार परिवार तीन साल से झेल रहे हैं ग्रामीण बहिष्कार का दंश, पलायन करने हो गए हैं मजबूर।

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एक कांग्रेसी नेता के संरक्षण में अवैध रेत उत्खनन से चालू होकर ग्रामीण बहिष्कार तक आ पहुंचा है मामला।

दबंगों ने समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार को भी दिया है देख लेने की धमकी।

बालोद जिले के ग्राम गोंड़पाल में वर्ष 2019 से लगातार एक कांग्रेसी नेता के संरक्षण में अवैध रूप से किए जा रहे रेत उत्खनन के मामले में लोहार परिवार पर मुखबिरी किए जाने के संदेह को लेकर जारी हुआ विवाद उन दिनों से अब तक प्रशासनिक अनदेखी के चलते भारी तनाव पूर्ण हो गया है तथा कभी भी अप्रिय घटना घटित हो जाने की प्रबल संभावना बनी हुई हैं। हालांकि मामले की जानकारी होने के बाद अतिरिक्त तहसीलदार बालोद श्री आशुतोष शर्मा जी ने मामले की नजाकत को देखते हुए संवेदनशीलता का परिचय देते हुए तत्काल ग्राम गोंड़पाल का दौरा कर दोनो पक्षों को आमने सामने बैठाकर मामले को सुलझाने का भरपूर किया है प्रयास। लेकिन कुछ दबंग किस्म के लोगों के द्वारा अतिरिक्त तहसीलदार महोदय जी के समझाईस को भी धता बताते हुए मनमानी पर उतारू बताए जा रहे हैं। इसके पूर्व  पीड़ित परिवार तथा लोहार समाज के प्रदेश संगठन के द्वारा पुलिस अधीक्षक बालोद, जिला कलेक्टर बालोद तथा अनुविभागीय अधिकारी बालोद के समक्ष भी उचित न्याय बाबत लगा चुके हैं गुहार। लेकिन प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनकी नही सुनी गई फरियाद। फलस्वरूप मामला और भी ज्यादा हो गया है विष्फोटक। वहीं दबंगों के द्वारा समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार को भी देख लेने की दिया है धमकी।

अवगत हो कि ग्राम पंचायत मुल्लेगुड़ा के आश्रित ग्राम गोंड़पाल की नदी से कांग्रेस शासन काल में कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व विधायक के संरक्षण में ग्राम गोंड़पाल निवासी कस्तू राम पिता रामाधार केवट तथा उनके कुछ साथियों के नेतृत्व में वेदराम निषाद एवं ओमू उर्फ ओमप्रकाश पिता गौकरण साहू के द्वारा अवैध रूप से उत्खनन करते हुए रेत चोरी कर शासन को लाखों रुपयों की राजस्व की हानि पहुंचाया जा रहा था। तत्संबंध में जिले के पत्रकारों के द्वारा विभिन्न समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित किया गया था। फलस्वरुप रेत उत्खनन में संलिप्त चैन माउंटेन व कुछ हाईवा गाड़ियों पर प्रशासन के द्वारा जप्ती की कार्रवाई किया गया था। जिससे बौखलाए कस्तू राम केवट एवं ओमू साहू के गुंडों के द्वारा मामले में समाचार प्रकाशित करने वाले पत्रकार कृष्णा गंजीर के कार में तोड़फोड़ किया था जिसकी थाना गुरुर में दिनांक 08 दिसंबर 2019 को रिपोर्ट दर्ज है तथा मामला अभी भी न्यायालय में विचाराधीन है।

इधर ऊपर नामांकित अवैध रेत उत्खनन कर्ताओं को आशंका था कि उक्त रेत उत्खनन की जानकारी पत्रकारों को गोंड़पाल निवासी लोहार परिवार के द्वारा दिया जाता रहा है। इसलिए कस्तू राम  एवं उनके साथियों के द्वारा दुर्भावना वश लोहार परिवार को सबक सिखाने एवं प्रताड़ित करने की नीयत से साजिश रच कर दिनांक 13 अगस्त 2021 को रात्रि लगभग 9.00 बजे के आसपास ग्राम गोंड़पाल में ग्रामीण बैठक कर लोहार परिवार के कलेश्वर विश्वकर्मा एवं उनके भाई जागेश्वर विश्वकर्मा को बैठक में बुलाकर बंधुआ मजदूर बनकर लोहारी कार्य करने हेतु दबाव बनाया गया। कलेश्वर विश्वकर्मा तथा उनके भाई के द्वारा बंधवा मजदूर बनकर लोहारी कार्य करने से मना किए जाने से बौखला कर कस्तू राम केवट ने बैठक में उपस्थित अन्य लोगों को अपने झांसे में लेकर लोहार परिवार को उनके पिता स्व श्री आशा राम विश्वकर्मा के जमाने से विगत पचास वर्षों से अधिक समय से काबिज लोहार दुकान संचालित कर अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे थे। उक्त लोहार दुकान को खाली करने का फरमान जारी कर दिया गया।

कलेश्वर विश्वकर्मा के द्वारा उक्त दुकान को खाली कर देने से उनके परिवार के बीच रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो जाने के कारण लोहार दुकान को खाली नही करवाने का निवेदन किया गया। लेकिन बदले की भावना से उन लोगों के द्वारा ग्रामीण समाज से बहिष्कृत करवा कर पूरे परिवार का हुक्का पानी, पौनी पसारी, दुकानों से सामान लेनदेन सहित बातचीत बंद करवा दिया गया। जबकि कुछ दिन पूर्व ही कलेश्वर विश्वकर्मा के मंझले भाई रामेश्वर विश्वकर्मा की युवा अवस्था में ही गरीबी के चलते गंभीर बीमारी से निधन हो गया था तथा उसके कुछ ही दिन पूर्व उनके पिता स्व श्री आशा राम विश्वकर्मा का भी अचानक मौत हो गया था, जिसके चलते इनका पूरा परिवार भाई स्व.श्री रामेश्वर विश्वकर्मा एवं पिता स्व.श्री आशा राम विश्वकर्मा के मौत के सदमे से उबर भी नही पाया था। कस्तूराम केवट का ऊंची राजनीतिक पहुंच एवं दखल होने के चलते ग्राम के सामान्य लोग उनके फरमान का उलंघन करने से डरते हैं तथा इनके गलत कृत्यों का विरोध करने की हिम्मत नहीं जुटा पाते जिसका नाजायज फायदा उठाते हुए उनकी मनमानी जारी है। कस्तू राम एवं उनके साथियों ने ग्रामीणों को चेतावनी दे रखा था कि ग्राम का कोई भी व्यक्ति लोहार परिवार के साथ किसी भी प्रकार से कोई संबंध नही रखेगा और ना ही कोई उन्हें सहयोग करेगा। यदि कोई व्यक्ति उनका किसी भी प्रकार से सहयोग करते पाया गया तो उनका भी हुक्का पानी, पौनी पसारी बंद कर दिया जाएगा। कस्तूराम के जारी फरमान के डर से ग्रामीण भी उनके आदेशों का पालन करने मजबूर थे।

मामले की जानकारी पीड़ित लोहार परिवार के द्वारा लिखित रूप में दिनांक 24 सितंबर 2021 को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक जिला बालोद के समक्ष उपस्थित होकर किया गया था। तथा दिनांक 02 अक्टूबर 2021 को सर्व लोहार समाज के प्रदेश महासचिव पीला दास विश्वकर्मा के द्वारा भी पुलिस अधीक्षक बालोद को पीड़ित लोहार परिवार को उचित न्याय दिलाने बात पत्र लिखकर अनुरोध करते हुए आवेदन पत्र की प्रतिलिपि कलेक्टर महोदय बालोद सहित अनुविभागीय अधिकारी बालोद को भी प्रेषित किया गया था।

लेकिन उस वक्त प्रदेश एवं जिले में कांग्रेस पार्टी की सत्ता सरकार होने के कारण कांग्रेस पार्टी की तत्कालीन व वर्तमान विधायक श्रीमती संगीता सिन्हा एवं उनके पति पूर्व विधायक भैय्या राम सिन्हा के राजनीतिक प्रभाव व हस्तक्षेप के चलते लोहार परिवार को न्याय नहीं मिल सका था। वहीं ग्रामीण समाज द्वारा सामाजिक बहिष्कार के चलते उनके विवाह योग्य पुत्र पुत्री की शादी भी रुका हुआ है तथा लोहार परिवार के कई अन्य सदस्य उपरोक्त अपमान एवं प्रताड़ना से तंग आकर अन्यत्र पलायन कर जीवन यापन करने मजबूर हैं तथा लोहार परिवार अनवरत आर्थिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं।

प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के बाद एक बार फिर उचित न्याय की उम्मीद में पीड़ित परिवार के द्वारा दिनांक 09 अप्रैल 2024 को अनुविभागीय अधिकारी बालोद के समक्ष पुनः आवेदन दिया गया लेकिन फिर भी प्रशासनिक उदासीनता के चलते उनके आवेदन पर कोई सुनवाई नहीं किया गया परिणाम स्वरूप पीड़ित परिवार लगातार प्रताड़ित होते रहे।

विगत दिनों कलेश्वर विश्वकर्मा की बेटी कुमारी धनेश्वरी विश्वकर्मा के द्वारा एक बार फिर न्याय की गुहार लगाते हुए कलेक्टर बालोद के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर न्याय की गुहार लगाई है, जिसके परिपालन में अतिरिक्त तहसीलदार श्री आशुतोष शर्मा ने दोनो पक्षों को बुलाकर मामले की जानकारी लिया जहां पर कस्तू राम एवं उनके साथियों के द्वारा अवैध रेत उत्खनन से जारी हुआ विवाद से मुकरते हुए झूठा कथन कर मामले को लोहारी दुकान को खाली नही करने के चलते विवाद होना बताया गया। जबकि उक्त लोहार दुकान का मामला गोंड़पाल के ग्रामीणों का ना हो कर ग्राम पंचायत मुल्लेगुड़ा का प्रशासनिक मामला था जिसके संबंध में ग्राम पंचायत मुल्लेगुड़ा के द्वारा कलेश्वर विश्वकर्मा को नोटिस भी जारी किया था तथा उक्त मामला अभी विचाराधीन है।

इसके बाउजूद भी ग्राम में आपसी सद्भावना एवं भाईचारा का वातावरण बना रहे इस आशय से अतिरिक्त तहसीलदार महोदय के द्वारा कलेश्वर विश्वकर्मा एवं उनके परिवार को उक्त लोहारी दुकान को खाली कर देने का सुझाव दिया गया तथा सौहाद्र पूर्ण तरीके से आपसी तालमेल बनाकर शांति पूर्वक रहने का समझाइए देते हुए आपसी सुलह करवाकर समझौता नामा तैयार करवा कर दोनो पक्षों का हस्ताक्षर लेकर मामले का पटाक्षेप किया था।

जहां पर अतिरिक्त तहसीलदार महोदय बालोद के निर्देशों का पालन करते हुए कलेश्वर विश्वकर्मा के द्वारा उक्त लोहारी दुकान को भी खाली कर दिया गया है। तथा लोहारी दुकान खाली कर दिए जाने की जानकारी अतिरिक्त तहसीलदार महोदय को फोन के माध्यम से दिया गया था। तत्पश्चात दिनांक 06 सितंबर 2024 को अतिरिक्त तहसीलदार महोदय के द्वारा किए गए समझौते की समीक्षा करने स्वयं ग्राम गोंड़पाल उपस्थित होकर ग्राम के नाई व दुकानदारों सहित ग्रामीणों को लोहार परिवार को दुकानों से समान लेने – देने तथा आपसी सहयोग करने की अपील किया था। लेकिन ग्राम के कुछ लोगों के द्वारा अब भी तहसीलदार महोदय के द्वारा किए गए अपील व दिए गए निर्देशों का उलंघन कर पीड़ित परिवार को प्रताड़ित करने में तुले हुए हैं, जिसके चलते अभी भी ग्राम गोंड़पाल में तनाव की स्थिति बनी हुई है। प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि समय रहते मामले को गंभीरता पूर्वक संज्ञान में लेकर पीड़ित परिवार को तत्काल न्याय दिलाई जाए तथा मानव अधिकारों की रक्षा करें। अन्यथा मामले को लेकर कभी भी भयावह स्थिति निर्मित हो जाने से इंकार नहीं किया जा सकता। चूंकि प्रदेश में लगातार देखा जा रहा है कि प्रशासनिक अनदेखी के चलते कई गंभीर घटनाएं लगातार घटित हो रही है, जिसका पुनरावृत्ति ग्राम गोंडपाल में ना हो। अब देखना होगा कि मामले पर प्रकाश डालते हुए समाचार प्रकाशन के बाद पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए प्रशासन क्या कुछ करती है।

 

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