प्रधान मंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार का जांच अधिकारी ही भ्रष्ट नजर आए।
जांच अधिकारी द्वारा जारी किए गए जांच रिपोर्ट ही जांच के दायरे में।
बालोद (सजग प्रहरी)। बालोद जिले के गुरुर विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत सुर्रा में प्रधान मंत्री आवास योजना में हुए भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने के बाद जनपद पंचायत गुरुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश रात्रे ने दो सदस्यीय जांच टीम का गठन कर मामले की जांच का आदेश दिया था। तदोपरांत नियुक्त किए गए जांच अधिकारियों ने मामले की जांच कर जांच रिपोर्ट तो सौंप दिया है, लेकिन जांच रिपोर्ट को अवलोकन करने पर पता चला कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाला जांच अधिकारी ही खुद भ्रष्ट नजर आए तथा उनके द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट ही जांच के घेरे में है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत सुर्रा की रहने वाली उर्वशी बाई पिता कुशल राम साहू पति ऋतुध्वज साहू ने अपनी असली पहचान छुपाकर गलत जानकारी प्रस्तुत कर अपने आप को उर्वशी/भुनूराम बताते हुए ग्राम पंचायत सुर्रा में प्रधान मंत्री आवास योजना के तहत आवेदन प्रस्तुत कर उक्त आवेदन को सचिव से सांठगांठ कर वर्ष 2020–21में अनुमोदन करवाने के उपरांत वर्ष 2022–23 में उक्त अनुमोदन के आधार पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास भी स्वीकृत करवा लिया। तथा उर्वशी बाई ने जिम्मेदारों से मिली भगत कर भुनू राम साहू के निजी आबादी भूमि खसरा नंबर 217/42 में बने मकान को प्रधान मंत्री आवास प्रदर्शित करते हुए योजना के तहत जारी राशि को हड़प कर लिए जाने की शिकायत मिला है।
उक्त मामले की जानकारी होने पर भूमि स्वामी भुनू राम साहू के द्वारा मुख्य कार्यपालन अधिकारी गुरूर को लिखित रूप में शिकायत करते हुए आपत्ति दर्ज कर जांच की मांग किया गया था। लेकिन मामले में जांच अधिकारी नियुक्त करारोपण अधिकारी ईश्वर लाल यादव एवं तकनीकी सहायक प्रधानमंत्री आवास चंद्रशेखर सिन्हा के ऊपर भ्रष्टाचार के ऊपर एक और भ्रष्टाचार का मीनार खड़ा करते हुए सच्चाई में पर्दा डालने के लिए उर्वशी बाई से फर्जी बटवारानामा तैयार करवा कर जांच को प्रभावित करने का आरोप लगा है। चूंकि जांच प्रतिवेदन में संलग्न किए गए कथित बटवारानामा में खसरा नंबर 217/42 में स्थित कथित उक्त प्रधानमंत्री आवास योजना का कहीं भी उल्लेख नहीं है। और ना ही उक्त बटवारानामा में बटवारा लिखने की तारीख का उल्लेख है, और ना ही बटवारा पाने वालों का कहीं भी हस्ताक्षर है, और ना ही उक्त बटवारा नामा में किसी भी गवाह का हस्ताक्षर है, और ना ही उक्त बटवारा नामा लिखने वाले दस्तावेज लेखक का नाम पता है। वहीं जांच में प्रस्तुत अपने कथन में भी उर्वशी बाई ने कहीं भी यह उल्लेख नहीं किया है कि भुनू राम साहू ने उन्हे या उनके पति ऋतुध्वज साहू को कोई बटवारा दिया है। उसके बाऊजूद जांच अधिकारी के द्वारा यह उल्लेख करना कि भुनूराम ने अपने पुत्रों कृष्ण कुमार एवं ऋतुधवज को बटवारा दे दिया था, जिस पर नियमानुसार प्रधानमंत्री आवास का निर्माण किया गया है तथा किसी को कोई आपत्ति नही है का उल्लेख बड़ा ही हास्यपद एवं आपत्ति जनक है। चूंकि अपने आवेदन में भूमि स्वामी ने स्पष्ट रूप से आपत्ति किया है कि बिना उनके सहमति एवं जानकारी के उनके निजी मकान को साजिश के तहत प्रधानमंत्री आवास के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। वहीं उनके पुत्र कृष्ण कुमार एवं ऋतु ध्वज ने भी उक्त बटवारा नामा की कहीं भी पुष्टि नहीं किया है। बल्कि आवेदक के पुत्र कथित रूप से बटवारा पाने वाले कृष्ण कुमार ने जांच रिपोर्ट में संलग्न बटवारा नामा को ही फर्जी करार दिया है। वहीं जांच अधिकारी ने जांच रिपोर्ट से कृष्ण कुमार के कथन को ही गायब कर दिया है ताकि सच्चाई सामने ना आ सके। जबकि प्रस्तुत जांच रिपोर्ट में कृष्ण कुमार का उपस्थित संलग्न किया गया है। मामले में सबसे बड़ा गौर करने वाली बात यह भी है कि योजना के तहत उर्वशी/भुनू राम के नाम से आवास स्वीकृत होना बताया जा रहा है, जबकि योजना के तहत निर्मित बताकर प्रदर्शित किए जा रहे मकान में उर्वशी पति ऋतुध्वज का नाम अंकित करवाया गया है।
विदित हो कि भारतीय संविधान तथा भू राजस्व अधिनियम के अनुसार किसी भी जनसमुदाय, सत्ता सरकार, या किसी भी संस्था को “किसी की निजी संपत्ति को बिना उक्त संपत्ति के मालिक के अनुमति या सहमति के अथवा उन्हें बिना मुआवजा भुगतान किए बलात रूप से अधिग्रहण करने अथवा अधिग्रहण संबंधी अनुशंसा करने या आदेश देने का अधिकार ही नही है। फिर ऐसी स्थिति में कोई भी ग्रामसभा किसी व्यक्ति के निजी संपत्ति पर बिना उनके सहमति या अनुमति के कैसे कोई प्रस्ताव पारित कर सकता है।
उपरोक्त तथ्यों को अवलोकन करने से स्वतः प्रमाणित हो जाता है कि जनपद पंचायत गुरुर द्वारा नियुक्त जांच अधिकारी ईश्वर लाल यादव एवं चंद्र शेखर सिन्हा खुद भ्रष्टाचार में लिप्त होकर व्यक्ति विशेष को लाभान्वित करने के लिए गलत जांच रिपोर्ट तैयार कर शासन को गुमराह करने का कार्य किया है।