भगवत मर्मज्ञ पंडित अजय प्रसाद चतुर्वेदी जी के मुखारविंद से बह रही है भंवरमरा में श्रीमद भगवत ज्ञान यज्ञ कथा की अमृतधारा।

बालोद (सजग प्रहरी)। जिले के वनांचल ग्राम भंवरमरा में दिनांक 20 जनवरी 2025 से श्रीमद भगवत कथा की अमृत धारा बह रही है जहां पर आज पांचवें दिन भगवत मर्मज्ञ पंडित अजय प्रसाद चतुर्वेदी जी ने वामन अवतार की कथा सुनाते हुए कहा कि एक बार भक्त शिरोमणि प्रह्लाद के पौत्र दैत्यराज बलि ने इंद्र को परास्त कर स्वर्ग पर अधिकार कर लिया।पराजित इंद्र की दयनीय स्थिति को देखकर उनकी मां अदिति बहुत दुखी हुई तब उन्होंने अपने पुत्र के उद्धार के लिए भगवान श्रीहरि विष्णु की आराधना की। माता अदिति की आराधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट होकर बोले- हे देवी! चिंता मत करो। मैं तुम्हारे पुत्र के रूप में जन्म लेकर इंद्र को उसका खोया हुआ राज्य वापस दिलाऊंगा। समय आने पर भगवान श्रीहरि अदिति के गर्भ से वामन के रूप में अवतार लिया। उनके ब्रह्मचारी रूप को देखकर सभी देवता और ऋषि-मुनि आनंदित हो उठे। एक दिन भगवान वामन को पता चला कि राजा बलि स्वर्ग पर स्थायी अधिकार जमाने के लिए अश्वमेध यज्ञ करा रहा है, यह जानकर भगवान वामन वहां पहुंचे। भगवान वामन के तेज से यज्ञशाला प्रकाशित हो उठी। राजा बलि ने उन्हें एक उत्तम आसन पर बिठाकर उनका सत्कार किया और अंत में उनसे भेंट मांगने के लिए कहा। गुरु शुक्राचार्य की चेतावनी के बाद भी राजा बली ने भगवान वामन को वचन दे डाला।

इस पर भगवान वामन अपने कदमों के बराबर तीन पग भूमि भेंट में मांगी। बलि ने उनसे और अधिक मांगने का आग्रह किया, लेकिन भगवान वामन अपनी बात पर अड़े रहे। इस पर बलि ने हाथ में जल लेकर तीन पग भूमि देने का संकल्प ले लिया। संकल्प पूरा होते ही भगवान वामन का आकार बढ़ने लगा और वे वामन से विराट हो गए। राजा बलि द्वारा दिए वचन अनुसार उन्होंने एक पग से पूरी पृथ्वी और दूसरे पग से स्वर्ग को नाप लिया। तीसरे पग के लिए बलि ने अपना मस्तक आगे करते हुए बोला कि प्रभु, सम्पत्ति का स्वामी सम्पत्ति से बड़ा होता है। इसलिए तीसरा पग आप मेरे मस्तक पर रख दें। सब कुछ गंवा चुके बलि को अपने वचन से न फिरते देख भगवान वामन प्रसन्न हो गए। तब भगवान वामन ने राजा बलि से उनके वचनबद्धता से प्रसन्न होकर उसे पाताल का अधिपति बना दिया और देवताओं को उनके भय से मुक्ति दिलाई।
इस प्रकार पंडित अजय प्रसाद चतुर्वेदी जी ने भगवान विष्णु के वामन अवतार की कथा सुनाते हुए भगवत प्रेमी श्रोताओं से कहा कि भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि को दम्भ और अहंकार से बचने का संदेश दिया। इसी प्रकार इस कथा से पता चलता है कि चाहे आप कितने भी शक्तिशाली हों, आपको अपने –आपको भगवान के सामने समर्पित करना चाहिए। इस कथा से यह भी पता चलता है कि किसी भी चीज को स्थायी नहीं मानना चाहिए। इस कथा से पता चलता है कि मनुष्य को हमेशा अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण रखना चाहिए।
पंडित जी ने आगे कहा कि वामन अवतार की शारीरिक विशेषताओं में भी कई प्रतीकात्मकताएं हैं। उन्होंने कहा कि भगवान वामन अवतार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। वामन अवतार, ब्रह्मांड में संतुलन और व्यवस्था बहाल करने की दैवीय शक्ति का प्रतीक है।
