कर्रेझर की 52 एकड़ जमीन बचाने के लिए आर-पार की जंग: 23 मार्च से राजाराव पठार में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल

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बालोद। जिला बालोद के गुरूर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत कर्रेझर की 52 एकड़ जमीन को बचाने और वहां आदिवासियों के लिए विश्वविद्यालय की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन होने जा रहा है।

अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के प्रदेश सचिव विनोद नेताम ने ‘सर्व आदिवासी समाज’ को पत्र लिखकर 23 मार्च 2026 से राजाराव पठार में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठने का ऐलान किया है। उन्होंने समाज से इस आंदोलन में सहयोग और समर्थन की मांग की है।


स्कूल के नाम पर जमीन हथियाने का आरोप
विनोद नेताम के अनुसार, कर्रेझर के माटीपुत्र किसानों ने यह जमीन स्कूल निर्माण के उद्देश्य से दी थी। आरोप है कि किसी अन्य जाति के व्यक्ति के प्रभाव में आकर इसे धमतरी की एक गरीब आदिवासी महिला के नाम पर खरीदा गया और बाद में विरोध के बावजूद इसे किसी रसूखदार के हाथ बेच दिया गया। आवेदक का कहना है कि पूंजीपति गरीब आदिवासियों की इस जमीन को वापस नहीं करना चाहते, जिसके विरोध में अब सीधे संघर्ष का रास्ता चुना गया है।


देशभर के आदिवासी बच्चों के लिए यूनिवर्सिटी की मांग
आंदोलनकारी नेताम का तर्क है कि देश में विभिन्न धर्मों और वर्गों के अपने बड़े संस्थान और यूनिवर्सिटी हैं, लेकिन आदिवासियों के पास ऐसी कोई विशेष सुविधा नहीं है। उनकी मांग है कि या तो यह 52 एकड़ जमीन मूल किसानों को वापस की जाए, या फिर यहां देशभर के आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए एक भव्य विश्वविद्यालय (यूनिवर्सिटी) स्थापित की जाए।

ऐतिहासिक राजाराव पठार बनेगा आंदोलन का केंद्र
बता दें कि राजाराव पठार तीन जिलों के आदिवासी समाज की आस्था का केंद्र है, जहां हर साल शहीद वीर नारायण सिंह की स्मृति में मेला लगता है। इसी पवित्र स्थल को अब न्याय की लड़ाई का केंद्र बनाया जा रहा है। विनोद नेताम ने स्पष्ट किया है कि यह लड़ाई समाज की बेहतरी और आने वाली पीढ़ियों के हक के लिए है।

 

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