बड़ा सवाल– आखिर कौन भरेगा नुकसानी की भरपाई, दो गुट के बीच पिस गया छाजेड़ परिवार, करोड़ों का हो गया नुकसान।

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बालोद (सजग प्रहरी)।  बालोद जिले के गुरूर विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत कनेरी इन दिनों राजनीति का अखाड़ा बना हुआ बताया जा रहा है। जहां पर चुने हुए जनप्रतिनिधि को जनहित के मामलों में भी बिना ग्रामीणों से पूछे कुछ भी निर्णय लेने का अधिकार नही है तथा निर्वाचित जन प्रतिनिधियों को मिले पंचायती राज अधिनियम में संवैधानिक अधिकारों का भी हनन होने की मिली है जानकारी।

ऐसे ही एक मामले में देखने को मिला जहां पर ग्राम पंचायत कनेरी के सरपंच एवं पंचायत पदाधिकारियों ने पूर्व से संचालित जिनकुशल एग्रो फर्म के अरवा राइस मिल कनेरी को EPT तकनीक से उसना राइस मिल संचालन हेतु नियमानुसार शुल्क लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी किया था, लेकिन उक्त अनापत्ति प्रमाण पत्र को लेकर गांव में बवाल मचा हुआ बताया जा रहा है। तथा ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए गए अनापत्ति प्रमाण पत्र को निरस्त करने ग्राम कनेरी में ग्रामीणों का बैठक रखकर दबाव बनाकर उक्त अनापत्ति प्रमाण पत्र को निरस्त करवा दिए जाने की भी जानकारी मिला है।

वहीं मामले पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फर्म के संचालक ने अपनी पीड़ा बयां करते हुए बताया कि अनापत्ति प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिए जाने से सबसे बड़ा खमियाजा उनके जिनकुशल एग्रोटेक कनेरी को भुगतना पड़ रहा है। चूंकि उन्हें नियमानुसार पंचायत द्वारा अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त हो जाने के उपरांत ही उन्होंने पर्यावरण विभाग, उद्योग विभाग, विद्युत वितरण विभाग जैसे विभिन्न विभागों से भी अनापत्ति प्रमाण पत्र प्राप्त कर उसना राइस मिल संचालन हेतु आवश्यक उपकरण तथा मशीनों की खरीददारी में करोड़ों रुपयों खर्च कर लिया है। लेकिन ग्राम पंचायत द्वारा जारी किए गए अपने ही निर्णय को अचानक प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के परिपालन किए बिना ही ग्रामीणों के दबाव में आकर निरस्त कर दिया गया है जो कि नियम विपरीत है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस मामले में जिन कुशल एग्रोटेक के संचालक का क्या कसूर है कि पंचायत एवं ग्रामीणों के बीच के आंतरिक मामलों में उन्हें पीसा जा रहा है। तथा सवाल यह भी है कि आखिर उन्हें अब तक हुए करोड़ों रुपए की भरपाई कौन करेगा।

                 ब्यूरो चीफ–विद्या सागर गंजीर की रिपोर्ट 

 

 

 

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