मजबूर किसानों के पेट को जोंक, किन्नी की तरह बेहताशा चूसता रहा है राजस्व विभाग का कई पेटमारी।

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मामले की शिकायत तहसीलदार गुरूर से की गई है, लेकिन किसान को अब तक नहीं मिला है न्याय।

सजग प्रहरी/04/01//2025

बालोद जिले के गुरूर तहसील में पदस्थ कई पटवारीयों के द्वारा मजबूर किसानों को डरा धमका कर रिश्वत में रुपए लूटने का मामला प्रकाश में आया है। जहां पर पदस्थ पटवारीयों ने अभिलेख दुरुस्ती करण सहित कई कारणों से नगद एवं फोन पेय के माध्यम से किस्तों में लिया है किसानों से रिश्वत।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विकास खण्ड के एक किसान ने ग्राम के ही एक अन्य किसान से भूमि क्रय किया है। उपरोक्त क्रय किए गए भूमि के नामांतरण अभिलेख दुरुस्तीकरण के नाम पर हल्का पटवारी के द्वारा रिश्वत की मांग किया गया। किसान के द्वारा रिश्वत देने से इनकार करने पर पटवारी के द्वारा धमकी दिया गया कि हमें भी अपने उच्च अधिकारियों राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार, एस.डी.एम. को रुपए देना पड़ता है। राजस्व विभाग में बिना रिश्वत लेनदेन के कोई काम नहीं बनता। यदि रिश्वत में रुपए नहीं दोगे तो तुम्हारा मामला महीना लंबीत पड़ा रहेगा, फिर लगाते रहोगे तहसील कार्यालय का चक्कर। पटवारी ने किसान को डराते हुए कहा कि यदि अभिलेख दृष्टीकरण करते समय एक भी अंक या शब्द इधर से उधर हो गया तो उसे सुधारने के लिए वर्षों कोर्ट कचहरी का चक्कर लगाना पड़ेगा। पटवारी द्वारा दिए गए धमकी से भयभीत किसान कहीं अभिलेख दुरुस्ती करण में किसी भी प्रकार की कोई गड़बड़ी न कर दे इसलिए नहीं चाहते हुए भी मजबूरी में भयभीत होकर पीड़ित किसान उक्त धमकी बाज  पटवारी के चंगुल में फंसकर  पहली बार दिनांक 31 मई 2024 को ₹7000, दूसरी बार दिनांक 30 सितंबर 24 को ₹5000, तीसरी बार दिनांक 18 अक्टूबर 24 को ₹3000, चौथी बार दिनांक 03 नवंबर 2024 को ₹5000, पांचवीं बार दिनांक 20 नवंबर 2024 को₹5000 फोनपेय के माध्यम से तथा दिनांक 25 नवंबर 2024 को ₹20000 नगद इस प्रकार कुल 45000 रुपए रिश्वत दिया है। वसूली बाज पटवारी के द्वारा किसान को भयभीत कर रिश्वत लिए जाने से किसान अपने आप को ठगा हुआ महसूस कर पश्चाताप कर रहा है।

उक्त वसूलीबाज पटवारी के द्वारा लिए गए रिश्वत के कारण कर्ज में लदे परेशान किसान के द्वारा दिनांक 30 दिसंबर 2024 को लिखित रूप में तहसीलदार गुरूर को उपरोक्त रिश्वत लिए जाने की शिकायत किया है। तथा तहसीलदार से मांग किया है कि उनके द्वारा दिए गए रिश्वत की रकम को उन्हें वापस दिलाई जाए तथा वसूलीबाज पटवारी के विरुद्ध उचित कठोर कानूनी कार्रवाई किया जाए। लेकिन शिकायत के बावजूद अभी तक पीड़ित किसान को तहसील कार्यालय से न्याय नहीं मिल पाया है। अब आगे देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी किसान को न्याय दिला पाते है कि……..

 

 


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