उद्यानिकी महाविद्यालय के नाम पर अधिग्रहीत की गई कृषि भूमि पर कर्रेझर के आदिवासी किसानों ने धान बोवाई कर किया कब्जा।

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बालोद सजग प्रहरी। 01 मई 2025

अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर ग्राम कर्रेझर के आदिवासी किसानों ने ग्राम के गायता, बैगा, सिरहा के मार्गदर्शन एवं दिशा निर्देश पर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित हो कर ग्राम के देवी देवताओं का विधि पूर्वक पूजा अर्चना कर ठाकुर देव में परसा दोना में धान चढ़ाकर उनसे आशीर्वाद लिया तथा ठाकुर देव जी के आदेशानुसार कृषि कार्य का शुभ शुरुआत भी किया। इस दौरान कर्रेझर के आदिवासी ग्रामीण किसानों ने एक जुट होकर उद्यानिकी महाविद्यालय के नाम पर गलत तरीके से अधिग्रहीत की गई कृषि भूमि पर अपना कब्जा प्रमाणित करते हुए उक्त भूमि पर विधि विधान से पूजा अर्चना कर सैकड़ों की संख्या में उपस्थित हो कर धान बीज का छिड़काव कर ट्रेक्टर चलाकर जोताई कार्य कर कृषि कार्य का आगाज कर दिया गया है। तथा उक्त विवादित भूमि पर अपना हक एवं कब्जा होने का दावा किया है।

अवगत हो कि बालोद जिले के गुरूर विकास खण्ड अंतर्गत ग्राम कर्रेझर में आदिवासियों की करोड़ों रुपयों की अचल संपत्ति कृषि भूमि को उद्यानिकी महाविद्यालय निर्माण के नाम पर एक भूमाफिया के द्वारा एक आदिवासी गरीब मजदूर महिला श्रीमती परमिला बाई सोरी के नाम पर लोगों को गुमराह कर रजिस्ट्री बैनामा के द्वारा अधिग्रहण कर लिया गया था तथा अब उक्त उद्यानिकी महाविद्यालय के नाम पर अधिग्रहण की गई कृषि भूमि को किसी रोमी सावलानी (सिंधी) नामक गैर आदिवासी व्यक्ति एवं उनके परिवार के व्यक्तियों के नाम पर बिक्री करने की साजिश का खुलासा हुआ है। मामले की खुलासा होते ही ग्राम कर्रेझर के आदिवासी समाज के लोगों ने उक्त कृषि भूमि को गैर आदिवासी व्यक्ति के नाम पर नामांतरण पर रोक लगाने बाबत प्रशासन के समक्ष आपत्ति दर्ज करवाया गया था तथा दिनांक 26 मार्च 2025 से राजा राव पठार मेला स्थल पर भूमकाल हुंकार आंदोलन का आगाज करते हुए अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए थे।

उक्त भूमि को किसी भी गैर आदिवासी के नाम पर नियम विपरित नामांतरण नहीं किए जाने का प्रशासन के आश्वासन के बाद आंदोलन को समाप्त किया गया था। वहीं वर्तमान भूमि स्वामी श्रीमती परमिला बाई सोरी ने भी न्यायालय में उपस्थित होकर उद्यानिकी महाविद्यालय के नाम पर अधिग्रहीत भूमि को किसी भी गैर आदिवासी व्यक्ति के नाम पर नामांतरण नहीं किए जाने का शपथ पूर्वक कथन करते हुए शासन प्रशासन से मांग किया है कि उक्त भूमि को गैर आदिवासी के नाम पर नामांतरण बाबत प्रस्तुत आवेदन को निरस्त करने की मांग किया है। तथा उन्होंने उक्त भूमि पर नीयत समय पर उद्यानिकी महाविद्यालय निर्माण नहीं किए जा सकने के कारण शर्तानुसार उक्त भूमि को पूर्व के भूमि स्वामीयों के नाम पर पुनः नामांतरण करने में किसी भी प्रकार की आपत्ति होने से इंकार किया है। तथा उक्त भूमि को अपने कब्जे से मुक्त कर दिए जाने का कथन करते हुए ग्राम कर्रेझर के आदिवासीयों का कब्जा होना स्वीकार किया है।


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