प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा लाखों बेकसूर नगर वासियों को भुगतना पड़ रहा है।

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अब के बारिश में तो ये कार-ए-ज़ियाँ होना ही था!
अपनी कच्ची बस्तियों को बे-निशाँ होना ही था !!
–महेश दुबे (टाटा महराज)

गोविन्द शर्मा की रिपोर्ट
बिलासपुर/सजग प्रहरी।   प्रशासन की अनदेखी के चलते बिना मास्टर प्लान के बेहतशा कालोनी निर्माण तथा खेत खलिहानों में अव्यवस्थित तरीके से मकान निर्माण किए जाने के कारण वर्षा जल की निकासी अवरुद्ध हो गया है फलस्वरूप लगभग आधा महानगर जलमग्न हो चला है जिसका दुष्परिणाम आज बिलासपुर के नगर वासियों को भुगतना पड़ रहा है। तथा दूषित जल भराव के कारण जलजनित बीमारी हैजा, प्लेग, डायरिया जैसे कई प्रकार की बीमारी पनपने की प्रबल संभावना बनी हुई है।

अवगत हो कि आज से लगभग पच्चीस–तीस वर्ष पहले तक जिस जमीन पर कृषि कार्य होता था वहां की वर्षा का पानी आसानी से प्रवाहित होता था। लेकिन तेजी से बदलते हालात, जमीनों के मूल्यों पर हुईं बेतहाशा वृद्धि का परिणाम है कि एकड़ो पर बिकने वाले खेत-खलिहान आज वर्ग फुट के हिसाब से बिकने लगी है तथा वहां पर आज बिना मास्टर प्लान के बड़े बड़े कालोनी सहित अव्यवस्थित तरीके से भवन निर्माण किया जा चुका है फलस्वरूप वह क्षेत्र जल भराव स्थल में तब्दील हो चुका है। उपरोक्त कालोनी एवं अव्यवस्थित तरीके से निर्मित भवनों के कारण व्यवस्था चरमरा गया है।

विकसित होते बिलासपुर महानगर का दुर्भाग्य ही रहा है कि अव्यवस्थित, मनमर्जी का विकास, सदैव पूंजीपतियों की प्राथमिकता में रहा लेकिन उन्होंने इस बात का ख्याल नहीं रखा कि प्रकृति अपना स्वभाव नहीं बदलती। पहले बारिशों का पानी सदैव खेत-खलिहानों से होकर गुजरते हुए नदी-नालों मे पहुचते थे। प्रकृति की अपनी व्यवस्था थी जो निरंतर आदि काल से चलीं आ रही थी जिस पर रोड़ा हम ही पैदा कर रहें हैं, खेत-खलिहानों में  कांक्रीट के जंगलों को खड़े करने के पहले बारिशों के पानी निकासी की समुचित व्यवस्था करनी थी जो नहीं कि गई। घरों के पानी को बाहर निकालने नालियों का निर्माण तो कर लिया लेकिन प्रकृति के बहाव का ध्यान ही नहीं रखा जिसका परिणाम आज सबके समाने है! फिर भी आज हम वही व्यवस्था एवं व्यवहार से कार्य कर रहे हैं, खाली जमीनों पर बन रहे भवन को थोड़ा ऊंचा कर लिया जाता है और पानी बाजू में खाली भूमि पर छोड़ दिया जाता है। यह स्थिति इस महानगर के प्रमुख क्षेत्र विद्यानगर, विनोबा नगर, पुराना बस स्टैंड, गुरु बिहार, व्यापार विहार सहित तेलीपारा, कश्यप कॉलोनी में आसानी से देखा जा सकता है।

सनद रहे इस विकट समस्या से सीख ना लेकर अपनी ढर्रे में चल रहे हैं नगर निगम एवं जिला प्रशासन को चाहिए कि नए बसने वाले कालोनियों एवं आसपास के क्षेत्रों में बन रहे मकानों पर अपनी कड़ी नजर रखें अन्यथा ऐसी स्थिति विकास के नाम पर प्रकृति के नियमों के साथ खिलवाड़ करने का दुष्परिणाम सभी को भोगना पड़ेगा।

उपरोक्त स्थिति को देखते हुए शायराना अंदाज में महेश दुबे टाटा महाराज ने कुछ पंक्तियां कहा है कि –

“बस्ती के घरों को क्या देखे बुनियाद की हुरमत क्या जाने!
सैलाब का शिकवा कौन करे सैलाब तो अंधा पानी है!!

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