हजारों की संख्या में मितानिनों ने बरसते पानी में संयुक्त जिला कार्यलय बालोद के बाहर प्रदर्शन करते हुए।
बालोद सजग प्रहरी।
पूरे प्रदेश सहित बालोद जिले में भी हजारों मितानिनें अपनी विभिन्न मांगो को लेकर मैदान पर उतर चुकी है। जिसकी तस्वीर राजधानी रायपुर से लेकर अब बालोद संयुक्त जिला कार्यलय के बाहर भी देखा जा रहा है।
अवगत हो कि कि स्वास्थ्य सेवा में ग्राऊंड जीरो हेल्थ वर्कर के तौर पर कार्यरत इन मितानिनों की कई मांगें रही है और इन मांगों में से कई मांगों को पूरा करने का वादा भारतीय जनता पार्टी के डबल इंजन सरकार के द्वारा किया गया था। किन्तु जैसा कि हर दफा आमतौर पर देखा जाता रहा है कि राजनितिक दल सरकार बना लेने के बाद अपने ही किये हुए वायदे को पूरा करने हेतू आनाकानी, टालमटोल करते हुए नजर आते है।


मितानिनों का कहना है कि वे 21 वर्षों से काम कर रही हैं, लेकिन अभी तक उन्हें संविलियन का लाभ नहीं मिला है। उनका यह भी कहना है कि उन्हें मिलने वाली प्रोत्साहन राशि और क्षतिपूर्ति राशि भी बहुत कम है। मितानिनों का यह भी आरोप है कि उनकी मांगों पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है। मितानिनों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के बैनर तले आंदोलन कर रही हैं। मितानिनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

विदित हो कि इन्ही ग्राऊंड जीरो हेल्थ वर्करों ने विश्वव्यापी महामारी कोविड 19 कोरोना काल जैसे संकट के समय में सरकार का कंधे से कंधा मिलाकर करोड़ों लोगों की जान बचाने का बेहतरीन काम कर दिखाया है, तो वहीं दूसरी ओर सरकार इन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से काम निकालने के बाद अब इन्ही ग्राऊंड जीरो हेल्थ वर्करों को उनकी मांगो पर तरसा रही है। परिणाम स्वरुप राजधानी रायपुर से लेकर प्रदेश के लगभग सभी जिलो में कार्यरत मितानिनें और अन्य ग्राऊंड जीरो हेल्थ वर्कर सरकार से नराज चल रहे है। बहरहाल नाराजगी का आलम यह बना हुआ है कि मितानिन के रूप में कार्यरत महिलाएं सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरते हुए जिला मुख्यालयो के अंदर मौजूद जिला कलेक्टर से बडी संख्या में मिलने के लिये पहुंच रही है।

