एक बार फिर जनपद पंचायत गुरूर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश रात्रे के कार्य शैली पर बड़ा सवाल!

0
Share this news

बालोद / सजग प्रहरी।  बालोद जिला अंतर्गत जनपद पंचायत गुरूर अधीनस्थ ग्राम पंचायतों के निर्वाचित पूर्व जनप्रतिनिधियों ने जनपद पंचायत गुरूर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश रात्रे के कार्य शैली पर कड़ा एतराज जताया है। तथा उनके ऊपर भाई भतीजावाद के नजरिए से कार्य करने तथा अड़ियल रवैया अपनाने व मनमानी करने का गंभीर आरोप लगाया है।

मामले पर प्रकाश डालते हुए सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष यशवंत पुरी गोस्वामी सहित संघ के पदाधिकारियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि जनपद पंचायत गुरूर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मनमानी पर उतर आए हैं। सरपंच संघ के पूर्व अध्यक्ष यशवंतपुरी गोस्वामी तथा संघ के पदाधिकारी व सदस्य रहे ग्राम पंचायत घोघोपुरी के पूर्व सरपंच लीलाराम सिन्हा, ग्राम पंचायत दर्रा के पूर्व सरपंच लच्छू राम देशलहरे, ग्राम पंचायत पेंडरवानी के पूर्व सरपंच सत्यवान साहू, ग्राम पंचायत परसूली के पूर्व सरपंच मोती राम देवांगन, ग्राम पंचायत बड़भूम के पूर्व सरपंच बल्लाराम कुंजाम सहित दर्जनों पूर्व सरपंचों ने आरोप लगाया है कि बालोद जिले के अन्य जनपद पंचायतों के पूर्व सरपंचों का मानदेय की राशि का भुगतान कर दिया गया है, लेकिन जनपद पंचायत गुरूर अधीनस्थ ग्राम पंचायतों के सरपंचों का लगभग सात महीने का मानदेय का भुगतान मुख्य कार्यपालन अधिकारी गुरूर के द्वारा नहीं किया गया है। तत्संबंध में पूर्व सरपंचों ने पत्र जारी कर बकाया मानदेय की राशि तत्काल प्रदान करने जिला पंचायत बालोद से मांग किया है।


मामले में सबसे दिलचस्प बात यह है कि अभी वर्ष 2025 के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नव निर्वाचित सरपंचों का भी मानदेय राशि का भुगतान कर दिया गया है किंतु पूर्व सरपंचों का मानदेय अभी तक सात महीनों से भुगतान नहीं किया गया है। संघ के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने सवाल किया है कि आखिर जनपद पंचायत गुरूर के मुख्य कार्य पालन अधिकारी नव निर्वाचित सरपंचों का मानदेय भुगतान तो कर दिया है लेकिन पूर्व सरपंचों का सात महीनों तक के मानदेय की राशि को भुगतान करने के बजाय क्यों लंबित रखा है? क्या छत्तीसगढ़ सरकार के पास पूर्व सरपंचों को मानदेय भुगतान करने बाबत राशि कम पड़ गया है? या पूर्व सरपंचों के बकाया मानदेय की राशि को देने की नियत नहीं है?

अवगत हो कि इसके पूर्व भी मुख्य कार्यपालन अधिकारी उमेश रात्रे के कार्य शैली को लेकर क्षेत्रीय जन–प्रतिनिधियों सहित जिले के पत्रकारों ने भी कई गंभीर सवाल उठाते रहे है। नाम नहीं छापने के शर्तों पर विकास खण्ड के दर्जनों पूर्व सरपंचों एवं सचिवों ने बताया कि जब से यह अधिकारी जनपद पंचायत गुरूर में पदस्थ हुए हैं क्षेत्र के ग्राम पंचायतों को भ्रष्टाचार का झरना बना बना चुके हैं। उन्होंने बताया कि लगभग हर बड़े त्योहारों के समय में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों एवं मीडिया को प्रोत्साहित करने के नाम पर प्रत्येक ग्राम पंचायतों से दबाव पूर्वक बड़ी धन राशि वसूली करवाते रहे हैं। विकास खण्ड के कई सचिवों ने बताया कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी के मौखिक निर्देशानुसार सचिव संघ के कुछ पदाधिकारियों के फोनपेय पर भी राशि का भुगतान किया गया है जिसकी स्क्रीनशॉट भी मीडिया के पास सुरक्षित है। लेकिन अब तक वसूली किए गए राशि से किन किन जनप्रतिनिधियों एवं मीडिया संस्थानों को जनपद पंचायत के द्वारा कब कब किन किन कारणों से प्रोत्साहित करते रहे हैं तथा अब तक कितने लाख रुपए की वसूली की गई तथा कितनी राशि प्रोत्साहन में खर्च किए गए इसका आज तक हिसाब नहीं दिया गया है।

मीडिया से जुड़े कुछ लोगों के द्वारा बताया गया है कि वर्ष में एक बार दीपावली त्योहार के समय मात्र कुछ चुनिंदा लोगों को लिफाफे में एक –एक हजार रुपए डालकर जनपद पंचायत गुरूर में पदस्थ एक बाबू के माध्यम से वितरण करवाया जाता रहा है। जबकि अब तक किसी भी जनप्रतिनियों को राशि प्रदान कर प्रोत्साहित किया गया हो इसकी जानकारी अब तक किसी को भी नहीं है।


विदित हो कि जनपद पंचायत गुरूर में कुल 79 ग्राम पंचायतें हैं इस हिसाब से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रत्येक ग्राम पंचायतों से उपरोक्त बहाने छोटी छोटी रकम वसूली कर कितना बड़ा धन राशि इकठ्ठा किया जा चुका है लेकिन उक्त इकट्ठा किए गए राशि को कहां खर्च किया गया है ?  एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है! आने वाले दिनों में मामला और गरमाने का कयास लगाए जा रहे हैं। अब देखने वाली बात होगी कि उपरोक्त मामले को लेकर ऊंट पहाड़ के किस करवट बैठता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हो सकता है आप चूक गए हों