शाला अनुदान की राशि सहित बच्चों के मध्यान भोजन के पापड़ एवं आचार को भी डकार गए प्रधान पाठक।

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                        संवाददाता शालू देवांगन

अपने कारनामों के कारण प्रधान पाठक दीनबंधु ठाकुर पूर्व में भी करवा चुका है फजीहत 

रायपुर:–   बालोद जिला अंतर्गत गुरुर विकास खण्ड के शिक्षा विभाग में विगत कुछ वर्षों से एक से अनेक हैरत अंगेज कारनामें देखने एवं सुनने को मिल रहे है, जिसके चलते शिक्षा विभाग की खूब किरकिरी भी हो रही है। वहीं ऐसे कारनामों के कारण आम लोगों का शिक्षकों के प्रति भरोसा व सम्मान में भी कमी देखने को मिल रहा है, जबकि शिक्षकों को राष्ट्र का निर्माता कहा जाता था तथा उन्हें बड़े ही सम्मान की दृष्टि से देखा जाता था।
विदित हो कि विगत वर्ष एक अय्याश किस्म के एक शिक्षक के द्वारा कुछ स्कूली बच्चियों को उनके पालकों के बिना लिखित सहमति के पिकनिक घुमाने के बहाने उनका हाथ पकड़ कर अपने इश्क का इजहार करने का सनसनी खेज मामला ने खूब बवंडर मचाया था, तो उसी विद्यालय के एक शिक्षक को एक छात्रा के साथ छेड़छाड़ करने एवं उनके नोटबुक में रुपए रखने के चलते जेल की हवा भी खानी पड़ी थी। अब एक बार फिर प्राथमिक विद्यालय रमतरा में पदस्थ प्रधान पाठक दीनबंधु ठाकुर के द्वारा भ्रष्टाचार का नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए शाला विकास के लिए शासन से प्राप्त शाला अनुदान की राशि को नियम विपरीत अपने निजी बैंक खाता में ट्रांसफर कर गबन करने एवं पोषण आहार के रूप में मध्यान भोजन में बच्चों को मिलने वाली पापड़ एवं आचार को भी डकार जाने की जानकारी मिला है। वहीं मामले में ब्लाक शिक्षा अधिकारी गुरुर ललित चंद्राकर ने बताया कि शाला अनुदान की राशि सहित अन्य मदों से भी प्राप्त राशि को सिर्फ वेंडर पद्धति से ही  शाला प्रबंधन समिति की अनुशंसा एवं प्रस्ताव के आधार पर ही व्यय किया जा सकता है। यदि किसी भी शिक्षक के द्वारा उक्त राशि को अपने निजी बैंक खाता में ट्रांसफर करता है तो ऐसा कृत्य भ्रष्टाचार की श्रेणी में आता है तथा उनके खिलाफ अपराधिक प्रकरण भी दर्ज हो सकता है।

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