ज्योति भानु चंद्राकर ने छत्तीसगढ़ी पारंम्परिक व्यंजन लाखड़ी भाजी संग फर्रा का स्वाद लेने अपने शुभचिंतकों को किया आमंत्रण।

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कुरूद /सजग प्रहरी।
छत्तीसगढ़ के पारंम्परिक व्यंजन लाखड़ी भाजी संग फर्रा का अपना अलग ही महत्व है। यह व्यंजन साल में एक बार ठंड के मौसम में लोगों को खाने को मिलता है इसीलिए इस व्यंजन को लेकर लोग बड़े चाव के साथ खाते हैं। फर्रा एक अति प्राचीन पारंपरिक छत्तीसगढ़ी व्यंजन है जिसे चावल के आटे को गूंथ कर गर्म पानी के भाप में पकाकर बनाया जाता है।


कुरूद नगर पालिका के अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर, समाजसेवी बोल बम सेवा समिति एवं वंदे मातरम् परिवार समिति के अध्यक्ष भानु चंद्राकर विगत 15 सालों से अपने निवास स्थान में लाखड़ी भाजी के साथ चावल के आटे से बना फर्रा व्यंजन तैयार करवाते हैं। और कुरूद के मीडिया जगत से जुड़े सहयोगियों को प्रेम भरा निमंत्रण देकर लाखड़ी (तीवरा)भाजी सहित फर्रा का सामूहिक भोज का आयोजन करते हैं।


अवगत हो कि इस साल भी यह आयोजन इनके द्वारा किया गया है। जिसमें मीडिया जगत के लोग शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार बसंत ध्रुव ने इस तरह के आयोजन से गदगद होकर कहा कि इस तरह का आयोजन साल में लगातार किया जाना चाहिए। ताकि सभी को काम से हटकर आपसी  हास्य, विनोद का भी मौका मिलता रहे। वहीं इस आयोजन को लेकर चंदन शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ के छत्तीस भाजियों (शाक) में से एक जो ठंड में बनाई जाती है तीवरा या लकड़ी भाजी जो ठंड शुरू होते ही आना चालू हो जाता है, छत्तीसगढ़ के लगभग सभी घरों में बनाया जाता है। इस अवसर पर मीडिया प्रतिनिधियों में श्रवण साहू, जमाल रिजवी, तुलसी साहू, मूलचंद सिंन्हा, अजय केला, संजय केला सहित मीडिया जगत के लोग शामिल हुए।

 

                     पत्रकार विद्या सागर गंजी की रिपोर्ट 

 

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