सुर्रा सोसायटी में प्रभारी प्रबंधक की लापरवाही के चलते किसानों ने समर्थन मूल्य पर नहीं बेच पाया धान।
गुरूर/सजग प्रहरी/17 नवंबर 2025
छत्तीसगढ़ सरकार ने पूरे प्रदेश भर में 15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर धान खरीदी करने का वादा किया था, लेकिन 15 नवंबर के पहले ही प्रदेश भर के सोसायटी कर्मचारी अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गए है। फलस्वरूप प्रशासन ने वैकल्पिक व्यवस्था कर अन्य विभागों के अधिकारी, कर्मचारियों को विभिन्न जिम्मेदारी देकर 15 नवंबर को अपने किए वादे के अनुसार धान खरीदी प्रारंभ करवाया है। जिसके तहत गुरूर विकास खण्ड के 22 उपार्जन केन्द्रों में से 18 उपार्जन केन्द्रों में उक्त तिथि को विधिवत धान खरीदी प्रारंभ हुआ है। वहीं 03 सोसायटी में किसी भी किसानों के द्वारा टोकन नहीं कटवाने के कारण धान खरीदी नहीं किया जा सका तथा 01 सोसायटी में प्राधिकृत अधिकारी की अनदेखी एवं प्रभारी प्रबंधक की घोर लापरवाही के कारण किसान धान नहीं बेच पाए।

प्राप्त जानकारी के अनुसार बालोद जिला अंतर्गत गुरूर विकास खण्ड के सेवा सहकारी समिति सुर्रा में जिला प्रशासन ने हल्का पटवारी चंद्रहास साहू को प्रभारी प्रबंधक नियुक्त किया है,
लेकिन प्रभारी प्रबंधक चंद्रहास साहू गैर जिम्मेदारी का परिचय देते हुए दिनांक 15 नवंबर को सेवा सहकारी समिति सुर्रा से गायब रहा जिसके कारण टोकन कटवाए पंजीकृत किसान समर्थन मूल्य पर धान विक्रय करने से वंचित रह गए। जबकि 15 नवंबर की तिथि के लिए 07 किसानों का टोकन कटा हुआ था।
धान विक्रय करने पहुंचे किसान डाकेश साहू
हालांकि उक्त तिथि को धान विक्रय करने से वंचित किसान सोसायटी में आगामी दिनों में टोकन संशोधन उपरांत धान विक्रय कर सकता है। किन्तु किसानी कार्य की व्यस्तता व संसाधन की कमी के चलते उक्त तिथि को धान विक्रय नहीं कर पाने के कारण उनका व्यवस्था चरमरा गया तथा उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

अवगत हो कि नोडल अधिकारी अभिषेक राय ने सोसायटी में उपस्थित अन्य कर्मचारियों एवं किसानों की उपस्थिति में लापरवाह प्रभारी प्रबंधक चंद्रहास साहू की अनुपस्थित बाबत पंचनामा भी तैयार करवाया है।

मामले की जानकारी मिलने के बाद अनुविभागीय अधिकारी गुरूर रामकुमार सोनकर ने तहसीलदार के नेतृत्व में राजस्व अधिकारियों की जांच टीम नियुक्त कर मामले की जांच करवाने की बात कहा है तथा आरोप सही पाए जाने पर उचित कार्रवाई किए जाने का आश्वासन भी दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि अनुविभागीय अधिकारी का आश्वासन पूर्व आश्वासन की भांति सिर्फ कथनी तक ही सीमित रह जाएगा या हकीकत के धरातल पर फलीभूत भी होगा।
