फिर उजागर हुआ जनपद पंचायत गुरूर के दामन में लगा भ्रष्टाचार का दाग ।

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बालोद/सजग प्रहरी।
जनपद पंचायत गुरूर में फिर एक बार भ्रष्टाचार के खेल का खुलासा हुआ है, जिसमें यहां पदस्थ संकाय सदस्य के द्वारा डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट के नाम पर विभिन्न ग्राम पंचायतों से लगभग ढाई लाख रुपए की अवैध तरीके से वसूली किए जाने का मामला सामने आया है।

अवगत हो कि ग्राम पंचायतों के सरपंच एवं सचिवों का DSC अपडेट करने का मतलब डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट प्रमाणित करना होता है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक पहचान प्रमाण है जिसका उपयोग किसी व्यक्ति या संगठन की पहचान को प्रमाणित करने के लिए किया जाता है। इसका उपयोग ऑनलाइन दस्तावेज़ों पर डिजिटल रूप से हस्ताक्षर करने, ई-फाइलिंग, और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन के लिए होता है। जिसे अपडेट करने की जिम्मेदारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी के द्वारा संकाय सदस्य को दिया गया है। जनपद पंचायत गुरूर अंतर्गत विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों ने आरोप लगाया है कि उक्त कार्य के लिए जनपद पंचायत गुरूर में पदस्थ संकाय सदस्य के द्वारा उनसे तीन–तीन हजार रुपए लिया गया है।

विकास खण्ड के सरपंचों ने बताया कि वे अभी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में नव निर्वाचित सरपंच चुनकर आए हैं। उन्हें जानकारी नहीं है कि डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट अपडेट करने के लिए भी पैसे लगते हैं। संकाय सदस्य के द्वारा सभी सरपंचों से उपरोक्त कार्य के लिए तीन–तीन हजार रुपए की मांग किया गया तथा जानकारी के अभाव में नव निर्वाचित सरपंचों के द्वारा उन्हें तीन–तीन हजार रुपए दिया गया है। इस भ्रष्टाचार के मामले की जानकारी मिलने पर जनपद पंचायत गुरूर के उपाध्यक्ष दुर्गानंद साहू ने उक्त भ्रष्ट संकाय सदस्य को जमकर फटकार लगाते हुए सरपंचों से अवैध रूप से लिए गए रूपये को तत्काल वापस करने की सख्त हिदायत दिया है। लेकिन उक्त संकाय सदस्य के द्वारा सरपंचों से लिए गए उक्त रूपये को वापस करने की अब तक जानकारी नहीं मिला है। बल्कि उनके द्वारा भ्रष्टाचार कर लिए गए रुपयों से अपना जेब गरम कर लिए जाने की बात बताई जा रही है। इस तरह के कृत्यों से लगातार जनपद पंचायत गुरूर की पहचान अवैध वसूली केन्द्र के रूप में बनती जा रही है।

 

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