‘सोखता गड्ढा’ बनाकर संवारें अपना भविष्य: ग्राम पंचायत तार्री में विशाल जल संचयन अभियान की शुरुआत
बालोद / ग्रामीण क्षेत्र: सरकार द्वारा जल संकट से निपटने और भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए एक ‘विशाल जल संचयन अभियान’ शुरू किया गया है। इस अभियान के तहत समस्त ग्रामवासियों से ‘सोखता गड्ढा’ बनाने और जल संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करने की अपील की गई है।
क्या है सोखता गड्ढा और यह क्यों जरूरी है?
अक्सर घरों से निकलने वाला बेकार पानी (जैसे नहाने, बर्तन धोने और कपड़े धोने का पानी) और वर्षा का जल व्यर्थ बहकर गंदगी फैलाता है। पोस्टर के माध्यम से बताया गया है कि इस पानी को एक व्यवस्थित ‘सोखता गड्ढे’ में डालकर जमीन के अंदर भेजा जा सकता है। इससे न केवल गंदगी कम होगी, बल्कि धरती का जल स्तर भी बढ़ेगा।
गड्ढे का निर्माण और मानक:
शासन के निर्देशानुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना के सभी लाभार्थियों और ग्रामीणों के लिए यह अनिवार्य किया गया है। गड्ढे के निर्माण के लिए निम्नलिखित मानक तय किए गए हैं:
• आकार: सोखता गड्ढे का मानक आकार 3 फीट लंबा, 3 फीट चौड़ा और 3 फीट गहरा (3x3x3) होना चाहिए।
सामग्री: गड्ढे को भरने के लिए कंकड़-पत्थर, बजरी और रेत का उपयोग किया जाता है, जो पानी को छानकर जमीन के नीचे भेजने में मदद करते हैं।
अभियान के मुख्य लाभ:
प्रशासन ने इस मुहिम से होने वाले फायदों पर जोर देते हुए बताया है कि:
1. स्वच्छता: गलियों में गंदा पानी इधर-उधर बहने से रुकेगा।स्वास्थ्य: जलजमाव न होने से बीमारियों (जैसे मच्छर जनित रोगों) से बचाव होगा।सुंदरता: गांव स्वच्छ और सुंदर नजर आएगा पर्यावरण: भूजल स्तर (Groundwater Level) में सुधार होगा, जिससे भविष्य में पानी की कमी नहीं होगी।
प्रशासन की अपील:
अधिकारियों ने ग्रामवासियों से अनुरोध किया है कि वे “चलो गांव को हरा-भरा और खुशहाल बनाएं” के संकल्प के साथ जल्द से जल्द अपने घरों में सोखता गड्ढा बनवाएं और शासन की इस विशेष मुहिम को सफल बनाने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करें।
संवाददाता –हेमलाल साहू की रिपोर्ट
