भीषण गर्मी और लू का तांडव: बालोद में पक्षियों की सामूहिक मौत, 44 डिग्री के पार पहुंचा पारा
बालोद/गुरूर। छत्तीसगढ़ प्रदेश समेत बालोद जिले में भीषण गर्मी और लू ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। जिले के गुरूर क्षेत्र में स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है, जहाँ चिलचिलाती धूप और बढ़ते तापमान के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे दुखद स्थिति मूक पशु-पक्षियों की है, जो पानी और छांव के अभाव में दम तोड़ रहे हैं। जिले में तापमान 44 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को पार कर गया है, जिससे इंसानों के साथ-साथ वन्यजीवों का अस्तित्व भी संकट में पड़ गया है।
पक्षियों पर मंडराया मौत का साया
गुरूर और आसपास के इलाकों से मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, गर्मी की तीव्रता इतनी अधिक है कि पक्षी झुंड के झुंड मरकर गिर रहे हैं। पेड़ों की छांव भी अब उन्हें तपिश से बचाने में नाकाम साबित हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पक्षियों की ऐसी सामूहिक मृत्यु पहले कभी नहीं देखी। पानी के प्राकृतिक स्रोत सूखने और लू के थपेड़ों के कारण आकाश में उड़ने वाले ये पक्षी जमीन पर गिरकर दम तोड़ रहे हैं, जिससे पर्यावरण प्रेमियों में गहरी चिंता व्याप्त है।
लू और बढ़ते तापमान से जनजीवन प्रभावित
सिर्फ वन्यजीव ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी इस ‘हीट वेव’ की चपेट में हैं। सुबह 10 बजे के बाद से ही सड़कों पर सन्नाटा पसरने लगता है। दोपहर होते-होते गर्म हवाएं (लू) थपेड़ों की तरह शरीर को झुलसा रही हैं। 44 डिग्री से अधिक तापमान होने के कारण लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं। अस्पतालों में भी डिहाइड्रेशन, उल्टी-दस्त और लू लगने के मरीजों की संख्या में अचानक बढ़ोतरी देखी गई है। प्रशासन ने लोगों को दोपहर के समय बाहर न निकलने और अधिक से अधिक तरल पदार्थों का सेवन करने की सलाह दी है।
कृषि और पशुपालन पर असर
भीषण गर्मी का सीधा असर खेती-किसानी और दुधारू पशुओं पर भी पड़ रहा है। चारे की कमी और बढ़ती गर्मी से मवेशी सुस्त पड़ गए हैं। जिले के कई जलाशयों का जलस्तर तेजी से गिर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में पेयजल संकट गहराने की आशंका भी बढ़ गई है।
मानवता दिखाने की अपील
इस संकटपूर्ण स्थिति को देखते हुए सामाजिक कार्यकर्ताओं और जीव प्रेमियों ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी छतों, आंगन और सार्वजनिक स्थानों पर पक्षियों के लिए पानी के सकोरे (मिट्टी के बर्तन) रखें और दाना डालें। गर्मी का यह प्रकोप न केवल एक मौसमी बदलाव है, बल्कि पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक बड़ी चेतावनी भी है।
