भीषण गर्मी से पहले जल संकट पर कड़ा रुख: सरपंचों ने पीएचई विभाग को घेरा, मरम्मत और नए बोर की मांग
बालोद / सजग प्रहरी। 27 फरवरी 2026
आगामी ग्रीष्मकाल में संभावित पेयजल संकट से निपटने के लिए क्षेत्र के सरपंचों ने कमर कस ली है। ग्रामीण इलाकों में पानी की किल्लत को दूर करने के लिए विभिन्न ग्राम पंचायतों के सरपंचों के एक प्रतिनिधिमंडल ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) के अनुविभागीय अधिकारी (SDO) से मुलाकात कर तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। विभाग ने भी सकारात्मक रुख दिखाते हुए सर्वे के बाद प्राथमिकता के आधार पर कार्य पूर्ण करने का आश्वासन दिया है।
पेयजल आपूर्ति के लिए ठोस कार्ययोजना की मांग:
बैठक के दौरान सरपंचों ने स्पष्ट किया कि यदि समय रहते जर्जर बुनियादी ढांचे को नहीं सुधारा गया, तो आने वाले महीनों में स्थिति गंभीर हो सकती है। मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई का आग्रह किया गया:
• जर्जर टंकियों का जीर्णोद्धार: लंबे समय से मरम्मत के अभाव में खराब पड़ी पानी की टंकियों को सुधारने की मांग की गई ताकि जल संग्रहण प्रभावित न हो।
• पाइपलाइन विस्तार: वंचित मोहल्लों में नई पाइपलाइन बिछाकर हर घर तक पानी पहुंचाने पर जोर दिया गया।
• नए बोर खनन: गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए चिन्हित स्थानों पर नए बोर खनन की आवश्यकता बताई गई।
इन सरपंचों ने दर्ज कराई अपनी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण चर्चा में तवेरा सरपंच शैलेन्द्र कुमार निषाद, कसौंदा सरपंच जितेन्द्र चंद्राकर, मुंदेरा सरपंच प्रीति ग्वालियर, देवरी (क) सरपंच नूज कुमारी देशमुख, जारवाय सरपंच हेमपुष्पा पटेल, जोरातराई सरपंच बृजलाल साहू, रुदा सरपंच निशा मारकंडे और डोंगीतराई सरपंच खिलेश्वरी महार प्रमुख रूप से शामिल थे।
अधिकारियों का रुख
पीएचई विभाग के एसडीओ ने सरपंचों की मांगों को गंभीरता से लेते हुए आश्वासन दिया कि विभाग जल्द ही प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराएगा। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य ग्रीष्मकाल में निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित करना है और इसके लिए आवश्यक मरम्मत व नए कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
